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Showing posts from December, 2018

तीन तलाक को राजनीतिक चश्मे से नहीं, वेदनाओं के आधार पर समझें

तीन तलाक बिल लोकसभा में तो पारित हो गया, लेकिन सबको अच्छी तरह से पता है कि राज्यसभा में तमाम विपक्षी दलों के सहयोग के बिना इसे पास नहीं कराया जा सकता... इस विषय पर मैं अपना पक्ष रखना चाहता हूँ... तीन तलाक विषय को किसी राजनीतिक परिप्रेक्ष्य से नहीं बल्कि मुस्लिम महिलाओं की वेदना को देखकर तय होना चाहिए... ये विधेयक किसी समुदाय, धर्म, आस्था के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के लिए इंसाफ तय करेगा... लोकसभा में हमारी सरकार ने यह जानकारी दी है कि जनवरी 2018 से 10 दिसंबर के बीच, हमारे सामने तीन तलाक के करीब 477 मामले आए... यहां तक कि बीते बुधवार को भी इस तरह का एक मामला हैदराबाद से हमारे सामने आया... इन्हीं वजहों से सरकार अध्यादेश लाई थी... मैं सदन से सर्वसम्मति से विधेयक पारित करने का आग्रह करता हूं... फिर कहता हूं कि इसे राजनीतिक परिप्रेक्ष्य से न देखा जाए... इस सदन ने दुष्कर्मियों के लिए फांसी का प्रावधान दिया है... इसी सदन ने दहेज और महिलाओं के हितों की रक्षा के लिए घरेलू हिंसा के खिलाफ विधेयक पारित किया है... इसलिए, हम क्यों नहीं इस विधेयक का एकस्वर में समर्थन कर सकते... मुस्लिम म...

सरकार की लगातार पहल पर हृदय से धन्यवाद

मैं आज अपने ब्लॉग के माध्यम से सबसे पहले माननीय प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में तीन तलाक पर केंद्र सरकार के सतत प्रयासों का स्वागत करता हूं। आज इसी सतत प्रयास का नतीजा है कि लोकसभा में तीन तलाक विधेयक पारित हुआ, भले ही विपक्षी दलों ने इस पर बहुत रूकावटें लाईं... मैं सबसे पहले तो मुस्लिम महिलाओं के प्रति ‘दशकों तक अन्याय' को लेकर ऐसे दल जिन्होंने 60 वर्षों से अधिक समय तक देश पर शासन किया, ऐसे मुस्लिम संगठन संगठन जिन्हौंने मुस्लिम महिलाओं की दर्द को कभी नहीं समझा, उनसे माफी मांगने की मांग करता हूं कि वह देश की उन तमाम मुस्लिम माताओं एवं बहनों से कहें कि हां मैं इतने वर्षों तक आपका गुनहगार रहा हूं। मैं विपक्षी दलों की उन सभी को बेकार मानता हूं कि जिसमें वो ये कह रहे हैं कि इसका उद्देश्य एक खास समुदाय को निशाना बनाना है। राजनीति तो कांग्रेस के वक्त हुई थी जब शाहबानो को न्याय नहीं मिला। उस वक्त सरकार ने दबाव में शाहबानो का अधिकार छीन लिया था। मैं केंद्रीय मंत्री आदरणीय श्री रविशंकर प्रसाद जी के उस वक्तव्य का स्वागत करता हूं, जिसमें उन्होंने एक खबर का जिक्र करते हुए कहा कि भारत को देखत...

मध्य प्रदेश में शुरू है कांग्रेस की मनमानी

मध्य प्रदेश में सत्ता आते ही कांग्रेस का जो  रवैया सामने आया है वह चौंकाने वाला इसलिए नहीं है क्योंकि कांग्रेसी नेताओं की फितरत से मैं काफ़ी समय से वाकिफ हूं... शपथ लेने के तुरंत बाद कांग्रेस के मंत्री सज्जन सिंह ने कहा है कि दंड भोगने से अच्छा है कि सरकारी कर्मचारी RSS की शाखा में न जाएं... सबसे ध्यान देने वाली बात यह है कि उन्होंने यह बात बहुत ही धमकी भरे लहजे में कहा है... वहीं एक और कैबिनेट मंत्री सुखदेव पांसे ने भी इशारों इशारों में मध्य प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों को यह धमकी दे डाली... मेरा मानना है कि ऐसा करना संविधान के खिलाफ होगा... आरएसएस एक सामाजिक सांस्कृतिक संगठन है... संविधान के अनुच्छेद 19 के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति को किसी भी सांस्कृतिक संगठन में भाग लेने का अधिकार है... जब आरएसएस अखिल भारतीय स्तर और प्रतिबंधित हो जाए तभी उसकी गतिविधियों में जाने और बैन लगाया जा सकता है... कल को आप बोलोगे कि आप खेलोगे नहीं, आप घूमने नहीं जाओगे, आप मंदिर नहीं जाओगे... ऐसा नहीं हो सकता... मध्य प्रदेश में ये आपातकाल सा प्रतीत हो रहा है... स्वयंसेवकों पर प्रतिबंध यानी स्वयंसेवक य...

आज का दिन बहुत खास

आज के दिन कोई  राजनीतिक चर्चा नहीं... क्योंकि हमारे लिए बहुत खास है क्योंकि एक तरफ भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेई जी की जयंती है तो वहीं देश के यशस्वी प्रधानमंत्री आदरणीय श्री नरेंद्र भाई मोदी जी ने हिंदुस्तान में विकास के आयाम में एक और पहलू को जोड़ते हुए असम के डिब्रूगढ़ में देश के सबसे लंबे बोगीबील पुल का उद्घाटन किया... आपको बता दें कि ब्रह्मपुत्र नदी पर बना पुल असम के तिनसुकिया से अरुणाचल प्रदेश के नाहरलगुन को आपस में जुड़ेगा... इस देश का सबसे लंबा पुल बताया जा रहा है... सबसे पहले बात श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेई जी की जयंती पर करते हैं...  वह एक ऐसे महान कवि महान वक्ता महान लेखक और महान पुरुष थे, जिन्होंने अपने जीवनकाल के दौरान देश को हर उस समय मार्गदर्शन दिया, जब जब देश विपरीत परिस्थितियों से गुजर रहा था... वह करोड़ों युवाओं के प्रेरणा स्रोत बने और भारतीय जनता पार्टी को आज इस मुकाम पर लाकर खड़ा किया... आज उन्हीं के दिए मार्गदर्शन पर हम देश के करोड़ों सच्चे सिपाही लगातार जनहित में प्रयत्नशील हैं... आइए इस महान व्यक्ति के जयंती पर हम सब शपथ लें ...

कुर्सी की खातिर महागठबंधन

देश में हाल के दिनों में विपक्षी दलों के द्वारा महागठबंधन के मुद्दे पर हर दिन कुछ न कुछ मीडिया में प्रसारित करने का ट्रेंड सा चल पड़ा है... विपक्षी दल यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि सारे महागठबंधन के दल एकजुट हैं, लेकिन मेरा इस पर यह मानना है कि आपकी एकजुटता को जनता अच्छी तरह समझती है... आप वही थे जो कभी एक दूसरे को गालियां दिया करते हैं, आप वही थे जो कभी एक दूसरे के खिलाफ पब्लिक से वोट की अपील करते हैं, आप वही हैं जो जीतने के बाद जनता को गुमराह कर अपनी सरकार बनाने का रास्ता निकालते हैं... आप वही हैं जो हमेशा जनता को ठगकर वोट मांगते रहे हैं और अपनी कुर्सी की राजनीति करते रहे हैं... महागठबंधन के प्रमुख घटक तेलुगू देशम पार्टी का गठन कांग्रेस की ज्यादती के खिलाफ दिवंगत मुख्यमंत्री एनटी रामाराव ने किया था, लेकिन अब पार्टी कांग्रेस से हाथ मिलाने का इच्छुक है... महागठबंधन में कुछ पार्टियों ने समाजवादी नेता राम मनोहर लोहिया से प्रेरित होने का दावा किया है लेकिन वे (लोहिया ने) स्वयं कांग्रेस की विचाराधारा के खिलाफ थे... आज कई लोग महागठबंधन की बात कर रहे हैं... गठबंधन निजी अस्तित्व को...

कांग्रेस के झूठे बोल से नहीं, इनके आंकड़ों से अब का फर्क समझिए

मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री आ. नरेन्द्र भाई मोदी के नेतृत्व में भारत की अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत हो रही है। ये खुद अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) का कहना है। आईएमएफ के अनुसार दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में भारतीय अर्थव्यवस्था सबसे तेजी से बढ़ रही है। कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2014-2015 से 2017-2018 के बीच 7.3 प्रतिशत की औसत वृद्धि दर दर्ज की है। विश्व में भारतीय अर्थव्यवस्था का हिस्सा 1960 से 2013 तक 1.8 प्रतिशत था, जो 2014 में 2.6 प्रतिशत और 2017 में बढ़कर 3.2 प्रतिशत हो गया। आईएमएफ का यह भी कहना है कि अगले साल 2019 में भारत सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था की रैंकिंग में ब्रिटेन से आगे निकल पांचवें स्थान पर आ सकता है। इसके साथ ही पीडब्ल्यूसी के अर्थशास्त्री माइक जैकमैन का पूर्वानुमान 2019 भी आईएमएफ के अनुमानों के समान है, जिसमें कहा गया है कि भारत दुनिया की तेजी से बढ़ती हुई बड़ी अर्थव्यवस्था है, जो ग्लोबल जीडीपी लीग टेबल में लगातार ऊपर की ओर तेजी से बढ़ रहा है। हम इससे पहले कांग्रेस नेतृत्व की पूर्ववर्ती यूपीए सरकार के अंतिम त...

हमें स्वस्थ राजनीति का परिचायक बनना होगा

आज मीडिया में चल रहे कुछ विषय को लेकर कुछ कहना चाहता हूं। सबसे पहली बात की हाल में देश के यशस्वी प्रधानमंत्री आदरणीय श्री नरेंद्र भाई मोदी जी ने देश को संबोधित करते हुए मीडिया से कुछ सवाल पूछे। उन्होंने कुछ प्रमुख योजनाओं और देश के विकास के कुछ हाल के महत्वपूर्ण आंकड़ों का उदाहरण देते हुए उन्हें उनके कर्तव्यों पर अडिग रहते हुए कार्य करते रहने की प्रेरणा दी। मेरे कहने का तात्पर्य केवल इतना है कि मीडिया में कुछ वक्तव्यों को इस तरह बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाता है और कुछ गंभीर विषय को इतना दबा दिया जाता है कि यह पक्षपात रवैया की ओर इशारा करने लगता है। दूसरा विषय आज मैं एक अपील के रूप में कहना चाहता हूं कि स्वार्थ के लिए किसी के साथ जुड़ते हैं और मौसम को बस देखकर और उसका अनुमान लगातर जनता के बीच दूसरा मुखौटा लगाकर जाते हैं तो ये स्वस्थ राजनीति का हिस्सा कभी नहीं कहा जा सकता। मैं बार-बार कहता हूं कि आप राजनेता हों या राजनीतिक दल,सबसे पहले एक विचारधारा रखते हैं जिस पर आप चुनाव लड़ते हैं, गलत को विरोध करते हैं, किसी का समर्थन करते हैं, या कुछ और... लेकिन इस विचारधारा को अलग हम बदलते रहेंगे तो...

डॉ. मनमोहन सिंह जी, आपकी योग्यता का उपयोग ही नहीं हुआ

हाल में देश के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आलोचनात्मक लहजे में कहा कि वह सिर्फ भारत के एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर ही नहीं, थे, बल्कि देश के एक्सीडेंटल वित्त मंत्री भी थे। पूर्व प्रधानमंत्री का ये बयान आलोचनात्मक और व्यंग्यात्मक राजनीति भरा है, मुझे पता है। लेकिन मुझे इस पर कहना है कि डॉ. मनमोहन सिंह साहब, आप बहुत प्रतिभावान हैं, अनुभवी भी हैं, एक्सीडेंटल वित्त मंत्री नहीं, बल्कि आप अर्थशास्त्र की बहुत अच्छी जानकारी रखते हैं, लेकिन हकीकत तो ये है कि आपकी प्रतिभा को कांग्रेस नेतृत्व ने कभी इस्तेमाल ही नहीं होने दिया। आपको मुखौटा बनाकर सारे फैसले किसी और ने लिए... आपको केवल एक साइनिंग अथॉरिटी बनाकर रखा गया। दूसरा विषय कि पूर्व प्रधानमंत्री ये कहते हैं कि वह हर विदेशी यात्रा के बाद मीडिया से मुखातिब होते थे जबकि मोदी जी ऐसा नहीं करते। इस पर मैं कहूंगा कि आप मौजूदा प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के रिकॉर्ड को अच्छे से ज़रा देखिए, वह हिन्दुस्तान ही नहीं बल्कि विदेशी मीडिया तक से रू-ब-रू होते हैं। लाइव बातें करते हैं... उस दौरान मीडिया क्या, सीधे पब्लिक उनसे सवाल-जवाब कर सकते हैं...

तानशाही की तर्ज पर मध्य प्रदेश में कमलनाथ सरकार

मध्य प्रदेश की कमान संभालने के पहले ही दिन सीएम कमलनाथ जी ने मध्य प्रदेश से बिहार   उत्तर प्रदेश  के युवाओं को बाहर करने का लगभग इंतजाम कर दिया... सोमवार को शपथ लेने के कुछ घंटों के बाद ही कमलनाथ जी ने सूबे के उद्योगों में 70 पर्सेंट रोजगार प्रदेश के युवाओं को देने के नियम पर हस्ताक्षर कर दिए। इसके मुताबिक राज्य के उन उद्योगों को ही इन्सेंटिंव यानी छूट दी जाएंगी, जिनमें 70 फीसदी रोजगार स्थानीय लोगों को दिया जाएगा। कमलनाथ जी का सीधे शब्दों में ये कहना कि उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों के लोग यहां आते हैं, लेकिन स्थानीय लोगों को जॉब नहीं मिल पाती और मैंने इसके लिए फाइल पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। उनके इस वक्तव्य से मुझे महाराष्ट्र में मनसे प्रमुख राज ठाकरे जी जैसी तानाशाही दिखी... मेरा इस पर दो विचार है सबसे पहला कि बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों के युवाओं को अगर मौका मिलता है तो उनकी योग्यता और मेहनतपन को देखकर ही मिलता है... दूसरा की यही तो हमारे देश का एक सांस्कृतिक सामंजस्य है कि हम एक दूसरे के साथ कदम से कदम मिलाकर चलते हैं... एक दूसरे से भेद नहीं करते... मध...

वोटिंग की उम्र कम करने की बहस पर मेरी राय

वर्ष 2020 में दुनिया के 40 देशों में सामान्य चुनाव प्रस्तावित है, जिनमें से भारत, अमेरिका, यूरोपियन, यूनियन, ईरान, सूडान, वर्मा, दक्षिण कोरिया, इथोपिया आदि प्रमुख देश है। इस कारण आज पूरे विश्व में वोटिंग उम्र 18 वर्ष से 16 वर्ष किये जाने के मुद्दे पर प्रमुखता से चर्चा हो रही है। विश्व के लगभग 90 प्रतिशत देशों में 18 वर्ष की उम्र वालों को वोटिंग का अधिकार प्राप्त है, किन्तु वर्ष 1970 से पूर्व केवल 21 वर्ष या इससे ऊपर के नागरिकों को वोटिंग का अधिकार प्राप्त था। सबसे पहले वर्ष 1970 में पश्चिमी यूरोप के देशों ने वर्ष 1971 में अमेरिका, वर्ष 1972 पश्चिमी यूरोप के देशों ने, वर्ष 1971 में अमेरिका, वर्ष 1972 में पश्चिमी जर्मनी तथा वर्ष 1974 में आस्ट्रेलिया ने अपने-अपने देशों ने वोटिंग की उम्र 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष की गयी, जबकि भारत में वर्ष 1988 से वोटिंग की उम्र 18 वर्ष की गयी। अमेरिका में वर्ष 2020 में प्रस्तावित सामान्य चुनाव में वोटिंग उम्र को 16 वर्ष किये की मांग को लेकर Vote-16 USA नाम से अभियान चल रहा है, जबकि यूरोप में भी New Age in Voting- EU नाम से अभियान चल रहा है। प्रजातं...

राफ़ेल पर फ़िर कांग्रेस का झूठ उजागर

राफेल विमान सौदे पर सुप्रीम की मुहर से कांग्रेस की झूठ का पर्दफ़ाश जो चुका है... पिछले एक साल से विभिन्न मंचों पर इस मुद्दे को उठाते हुए कांग्रेस ने झूठा माहौल बनाने की कोशिश की थी। पार्टी इस मुद्दे को लोकसभा चुनाव तक बरकरार रखना चाहती थी, ताकि वह प्रचार के दौरान भ्रष्टाचार का झूठा मुद्दा बनाकर सरकार को कटघरे में खड़ा कर सके। और आश्चर्य तब होता है जब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि हम भले ही अभी राफेल की संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की मांग पर बरकरार हैं... खुद कांग्रेस में कई नेता दबी ज़ुबान से इसे बिना जाने समझे उठाया गया मुद्दा समझते हैं... कांग्रेस का यह झूठ बेनकाब तो होना ही था क्योंकि झूठ भले ही कुछ समय के लिए परेशान करें लेकिन झूठ की उम्र नहीं होती...  सत्य की विजय होकर रहती है लेकिन दुखद मसला यह है कि अगर कांग्रेस इसी तरह मौजूदा केंद्र सरकार को बदनाम करने के लिए ऐसे ईमानदार सौदों पर सवाल उठाती रहेगी तो भविष्य में अधिकारियों और सशस्त्र बलों को देश हित में भी ऐसी प्रक्रिया शुरू करने से पहले 10 बार सोचना पड़ेगा... लेकिन एक दुखद मसले...

'द ग्रेट सियासी ड्रामा' के संचालन में आप सभी का स्वागत है

आज यह शीर्षक मुझे इसलिए देनी पड़ी, क्योंकि पिछले 2 दिनों से मध्यप्रदेश और राजस्थान को लेकर जिस तरह सियासी ड्रामा मचा हुआ है, वह निंदनीय है और और अलोकतांत्रिक है... कांग्रेस के प्रवक्ता टीवी चैनलों पर उसे लोकतंत्र का हिस्सा बताते हैं, लेकिन मैं उसे एक परिवारवाद का हिस्सा बताता हूँ... लोकतांत्रिक प्रक्रिया में तो एक विधायक दल का नेता उसका विधायक दल चुनता है... लेकिन कांग्रेस में ऐसा नहीं होता कांग्रेस में विधायक दल केवल औपचारिकता भर होती है आलाकमान सब कुछ तय करते हैं एक परिवार की अदालत लगती है उसमें एक परिवार अंतिम परिणाम देता है और उसे विधायक दल के बीच जाकर खानापूर्ति करके सुना दिया जाता है कि परिवार द्वारा यह फैसला ले लिया गया है और किसी विधायक दल में हिम्मत नहीं होती कि इस पर सवाल उठा पाएं... या कांग्रेस की परंपरा रही है और देश ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री चुनने में इसका प्रत्यक्ष उदाहरण पहले की तरह देख भी लिया ... सब कुछ एक परिवार बैठकर तैयार करती है... नाम तय हो जाता है और फिर जनता के बीच मुखौटा प्रस्तुत करने के लिए उन्हें दिल्ली से भोपाल इसलिए भेजा जाता है कि आप विधायक दल के ब...

कदम मिलाकर चलना होगा

हाल में पांच राज्यों के चुनाव परिणाम आने के बाद अक्सर सोशल मीडिया पर कुछ लोगों द्वारा यह सवाल पूछा जाता है कि 2019 में मोदी जी की लहर पर क्या असर पड़ने वाला है? इस विषय पर मेरा अपना निजी मंतव्य है... सबसे पहली बात जो मैंने पहले भी कहा है कि जिन राज्यों की यह चुनाव थे, वहां की जनता अपने राज्य के मुखिया को चुनती है... राज्य में विकास समेत कई मुद्दों पर वोट दिया जाता है और फिर विपक्ष में बैठकर आरोप लगाना और जनता को गुमराह करना आसान होता है... छत्तीसगढ़, राजस्थान और मध्य प्रदेश में हमारी सरकार थी और विपक्ष में बैठकर कांग्रेस ने जिस तरह से जनता को दिग्भ्रमित करने का काम किया, वह कुछ समय में जनता के बीच आ जाएगा, यह अलग मसला है... लेकिन हाल में आए परिणामों के बाद कांग्रेस पार्टी में मुख्यमंत्री पद को लेकर जिस तरह अलग-अलग राज्यों में रस्साकशी की होड़ मची हुई है| एक दूसरे के पक्ष में अनुशासनहीनता का डंका बजना शुरू हो चुका है, उसे देख कर जनता ताज्जुब में होगी... हमारे विपक्षी दलों को इस बात का भी अहसास होना चाहिए कि मध्यप्रदेश में जहां बीजेपी और कांग्रेस के बीच केवल 10810 मतों का अंतर रहा, व...

चुनाव परिणाम के बाद कमियों पर चिंता हो

राज्यों के चुनाव परिणाम लगभग सबके सामने हैं और मुझे ताज्जुब हो रहा है कि कांग्रेस के नेतागण पूरा परिणाम आने से पहले ही अपनी पीठ थपथपाना शुरू कर चुके हैं जबकि  सवाल उठता है कि 60 वर्षों से अधिक समय तक शासन करने वाली कांग्रेस की सरकार क्या आज इस कगार पर आ चुकी है कि बराबरी का टक्कर होने के बावजूद वह अपने अस्तित्व को तलाशने की खुशी मना रही है| वह इस बराबरी को भी अपनी जीत बता रही है और इसे मोदी जी की लहर से जोड़ रही है... दरअसल, कांग्रेस की स्थिति उस मछली की तरह हो चुकी है जो सत्ता से बाहर है और सत्ता को पाने के लिए छटपटा रही है| इसी का जीता जागता उदाहरण है कि कई राज्यों में चुनाव परिणाम आने से एक दिन पहले ही कांग्रेस नेताओं का अभिनंदन समारोह होने लगा... बैनर लगने लगे... लड्डू बनने लगे| ऐसा नहीं है कि इन चुनावों में आए परिणामों से मैं सोच में नहीं हूं| मेरा मानना है की जिन राज्यों में जिन सीटों पर कम वोट आए हैं उस पर वहां के संगठन का दायित्व है कि ऐसा क्यों हुआ उसके वजहों को वह तलाशे और उस पर कार्य आरंभ करें| चुनाव में जीत हार लगी होती है क्योंकि हम जैसा कार्य करते हैं, जनता...

अपील

आज किसी राजनीति विषय पर बात नहीं होगी बल्कि हृदय की गहराई और पूर्ण भावना से एक ऐसे विषय को उठाना चाहता हूं जो नितांत आवश्यक है| कल से पार्लियामेंट का सत्र शुरू हो रहा है| ऐसे में मैं सभी राजनीतिक दलों से यह अपील करना चाहता हूं कि वह संसद सत्र के दौरान सहयोग करें| राजनीति एक विषय है जिसके लिए सरकार भी है और विपक्ष भी| लेकिन सबका मकसद एक होना चाहिए- देश की भलाई, देश का विकास, जनकल्याण| लेकिन अक्सर ऐसा देखा जाता है कि संसद का सत्र सुचारू रूप से न चलने के कारण देश के करोड़ों रुपए का नुकसान होता है| जो कानून या बिल देशहित में लागू होनी चाहिए, उसमें अनावश्यक देरी होती है, जिससे जनता का नुकसान होता है| मैं सभी विपक्षी दलों से अपील करना चाहूंगा कि आप किसी भी विषय पर बहस करें, अपना पक्ष प्रस्तुत करें| जो सही दिशा हो, सरकार को देने की कोशिश करें लेकिन संसद का कार्य बाधित ना करें| क्योंकि  आपका भी मकसद और तमाम नीति सिद्धांत जनहित से शुरू होना चाहिए और जनहित पर ख़त्म होना चाहिए| आइए, इस संसद सत्र को सुचारू रूप से चलाने में सारे राजनितिक दल एक दूसरे का सहयोग करें...

मुझे देश की जनता पर पूरा भरोसा है

पांच राज्यों के चुनाव के नतीजे से पहले जिस तरह से एग्जिट पोल के नतीजे सामने आ रहे हैं, उसने देश को यह विचार करने को जरूर विवश कर दिया है कि एग्जिट पोल में जैसा दिखाया जा रहा है, क्या वैसा ही हकीकत में कुछ होने वाला है ? जिन राज्यों में चुनाव थे क्या वहां की जनता ने कांग्रेस नेतृत्व की पूर्ववर्ती यूपीए सरकार के कृत्यों और कई राज्यों में कांग्रेस की सरकार के कुशासन को भुला दिया है ? या कुछ मीडिया घराने जानबूझकर देश का ध्यान भटकाने के लिए एग्जिट पोल के आंकड़े के साथ हेरा-फेरी कर प्रस्तुत रहे हैं ? या विपक्षी दलों के इशारे पर कुछ मीडिया घराने जानबूझकर आ. मोदी जी सरकार की छवि धूमिल करने का प्रयास कर रही है ?  सवाल बहुत हैं और जवाब अगर ढूंढने की कोशिश करेंगे तो हमें सबसे पहले आदरणीय नरेंद्र मोदी जी की सरकार के साढे 4 वर्षों के सफर पर एक नजर डाली होगी... मुझे अच्छी तरह से याद है डॉ. मनमोहन सिंह जी जब यूपीए सरकार के दौरान प्रधानमंत्री थे, तब उन्हें आतंकवाद और काले धन पर अंकुश लगाने को लेकर  नसीहत दी गई थी... और उन्हें उस बैठक में सलाह दी गई थी कि आप 500 और 2000 के रुपयो...

हर मनुष्य की वाणी उसके विचारों का द्योतक है

चुनाव के दौरान कई बार ऐसे विवादास्पद बयान देखने को मिलते हैं जो किसी नेता के व्यक्तित्व को उजागर करता है, क्योंकि मेरा मानना है कि हमारी वाणी हमारे मन मस्तिष्क का परिचायक है जो हमारी सोच का द्योतक भी है... राजस्थान मैं जिस तरह शरद यादव जी का वसुंधरा राजे जी को लेकर विवादास्पद बयान आया है, उसकी जितनी निंदा की जाए वह कम है... राजनीति में मैं ऐसी बयानबाजी को सबसे निम्न स्तर की राजनीति मानता हूं... दूसरा विषय आज मैं अपने ब्लॉग के माध्यम से उल्लेख करना चाहूंगा कि क्रूड ऑइल के उत्पादन में कटौती को लेकर बड़े तेल उत्पादक देश अंतिम फैसला करने वाले हैं। इससे पहले सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्री ने आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की उपलब्धियों को लेकर अपना विचार व्यक्त किया है...  उन्होंने उन्होंने प्रधानमंत्री जी की विदेशी कूटनीतिक कौशल ता की तारीफ की है... तीसरा विषय में उल्लेख करना चाहूंगा उत्तर प्रदेश की घटना से...  उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री आदरणीय श्री योगी आदित्यनाथ जी ने जिस तरह बुलंदशहर की घटना के बाद खुद से एक्शन लिया और लगातार बैठकें करते रहे, वह एक मु...

कांग्रेस ने देश लुटवाया, भाजपा सरकार उसे समेट रही

यही फर्क हमारे भाजपा नेतृत्व की सरकार और कांग्रेस  नेतृत्व की सरकार का है कि कांग्रेस ने देश को लूटने का माहौल दिया और हमारी सरकार ने लूटने वालों पर शिकंजा कसा। इसका जीता जागता उदाहरण हमारे सामने है। भारतीय बैंक से करोड़ों का कर्ज लेकर ब्रिटेन भागे शराब कारोबारी विजय माल्या ने पूरा कर्ज लौटाने की बात कही है. माल्या ने ट्वीट कर कहा कि वह बैंकों का पूरा कर्ज लौटाने को तैयार हैं और बैंकों को उनका ऑफर स्वीकार कर लेना चाहिए. अब बंद हो चुकी किंगफियर एयरलाइंस के मालिक विजय माल्या का यह ट्वीट अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी चॉपर डील के कथित बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल के दुबई से भारत प्रत्यर्पित किए जाने के कुछ ही घंटे बाद आया है. केंद्र सरकार माल्या, नीरव मोदी और मेहुल चौकसी जैसे आर्थिक अपराधियों को भी भारत प्रत्यर्पित किए जाने की लगातार कोशिश कर रही है. बता दें कि विजय माल्‍या  फिलहाल लंदन में हैं, जहां उन्हें भारत प्रत्यर्पित किए जाने की याचिका पर वेस्टमिंस्टर कोर्ट में भी सुनवाई चल रही है. माल्या पर भारतीय बैंकों का 9000 करोड़ रुपये बकाया है. और ये सब कांग्रेस नेतृत्व की सरकार के दौरान...

देश का आदरणीय प्रधानमंत्री जी में विश्वास और बढ़ा

मुझे बहुत प्रसन्नता है कि देश ने एक बार फिर से यशस्वी प्रधानमंत्री आ. नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भरोसा दिखाने का दंभ भरा है। दरअसल, एक सर्वे में देश की राजधानी दिल्ली की जनता ने एक सिरे से साफ कर दिया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नाम पर आज भी चुनाव लड़ेंगे तो विपक्ष के सारे फॉर्मूले फेल हो जाएंगे। दिल्ली की सातों लोकसभा सीटों के आधार पर इस सर्वेक्षण की रिपोर्ट तैयार की गई है। यह दिखाता है कि हमारे माननीय प्रधानमंत्री जी लोकप्रियता आज भी हिन्दुस्तान में रहने वालों के दिलों में बसता है। दूसरा मैं अपने ब्लॉग के माध्यम से प्रधानमंत्री जी के उस वक्तव्य का समर्थन करता हूं जिसमें उन्होंने भारत-पाकिस्तान बंटवारे के वक्त की कांग्रेस की गलतियों को गिनाया। माननीय प्रधानमंत्री जी ने कहा कि इन्हीं गलतियों में से एक करतारपुर है। गुरुनानक देव की भूमि बंटवारे में पाकिस्तान में चली गई, क्योंकि कांग्रेस ने इस पर ध्यान नहीं दिया। यह हकीकत है कि विभाजन के वक्त अगर कांग्रेस नेताओं में इस बात की थोड़ी भी समझदारी, संवेदनशीलता और गंभीरता होती तो तीन किलोमीटर की दूरी पर हमारा करतारपुर हमसे अलग...

राहुल गांधी जी का पाकिस्तान प्रेम अब खुलकर सामने आया

आखिरकार वही बात सामने आयी जिसका शक था... कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू जी ने अपनी पाकिस्तान यात्रा पर  कहा है कि उन्हें पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी जी ने ही पाकिस्तान भेजा था। राहुल गांधी ही उनके कप्तान हैं। ये कांग्रेस का अनुशासन है कि मुख्यमंत्री का एक मन्त्री अपने मुखिया (मुख्यमंत्री) की बात सुनने को तैयार नहीं... और सरेआम मीडिया में इसका माखौल भी उड़ाता है... सिद्धू जी ने कहा कि पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने उन्हें पाकिस्तान जाने से मना किया था, लेकिन शशि थरूर, हरीश रावत और रणदीप सुरजेवाला समेत 50-100 कांग्रेसी नेताओं ने यात्रा से लौटकर उनकी पीठ थपथपाई। खालिस्तानी आतंकी और हाफिज सईद के करीबी गोपाल सिंह चावला के साथ सेल्फी के सवाल पर सिद्धू कहते हैं, 'अगर 10 हजार लोग आपके साथ सेल्फी ले रहे हों तो आप कैसे जानेंगे कि चावला कौन है?' कितना मज़ेदार है कि काज़ल की कोठरी में कोई कह रहा है कि काला कौन था, मुझे ध्यान नहीं... मेरे इस ब्लॉक का मतलब देश को फिर से एक बार याद दिलाने का है कि जो विषय में बार बार कहता हूं कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी जी का पाकिस्ता...