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चुनाव परिणाम के बाद कमियों पर चिंता हो


राज्यों के चुनाव परिणाम लगभग सबके सामने हैं और मुझे ताज्जुब हो रहा है कि कांग्रेस के नेतागण पूरा परिणाम आने से पहले ही अपनी पीठ थपथपाना शुरू कर चुके हैं जबकि  सवाल उठता है कि 60 वर्षों से अधिक समय तक शासन करने वाली कांग्रेस की सरकार क्या आज इस कगार पर आ चुकी है कि बराबरी का टक्कर होने के बावजूद वह अपने अस्तित्व को तलाशने की खुशी मना रही है| वह इस बराबरी को भी अपनी जीत बता रही है और इसे मोदी जी की लहर से जोड़ रही है... दरअसल, कांग्रेस की स्थिति उस मछली की तरह हो चुकी है जो सत्ता से बाहर है और सत्ता को पाने के लिए छटपटा रही है| इसी का जीता जागता उदाहरण है कि कई राज्यों में चुनाव परिणाम आने से एक दिन पहले ही कांग्रेस नेताओं का अभिनंदन समारोह होने लगा... बैनर लगने लगे... लड्डू बनने लगे|

ऐसा नहीं है कि इन चुनावों में आए परिणामों से मैं सोच में नहीं हूं| मेरा मानना है की जिन राज्यों में जिन सीटों पर कम वोट आए हैं उस पर वहां के संगठन का दायित्व है कि ऐसा क्यों हुआ उसके वजहों को वह तलाशे और उस पर कार्य आरंभ करें| चुनाव में जीत हार लगी होती है क्योंकि हम जैसा कार्य करते हैं, जनता उस अनुसार हमें वोट करती है... जनता सर्वमान्य है... ऐसा परिणाम आया है तो बेशक कुछ कमी रही है... वह कमी क्या है उसको दूर करने का कार्य करना चाहिए और भाजपा की विचारधारा रही है कि हम चाहे सत्ता पक्ष में हो, या विपक्ष में हों...  हम हर वक्त जनहित में बातें करते हैं, जनहित में आवाज उठाते हैं और जनहित में फैसले लेते हैं|

मैं एक और विषय कहना चाहता हूं कि अक्सर ऐसा देखा जाता है कि वर्ष 2014 के बाद से अक्सर ऐसा देखा जाता है कि कुछ भी हुआ देश में, उसे आदरणीय नरेंद्र भाई मोदी जी से जोड़ा जाता है| चाहे पंचायत चुनाव में कहीं सीट कम आई हो, या छोटे-मोटे चुनाव में, तुरंत मीडिया में यह बात विपक्षियों द्वारा कही जाने लगती है कि मोदी लहर कम हो चुका है| ऐसा नहीं है... मोदी लहर हम तब कब मानेंगे जब 2019 के चुनाव में हम पीछे रह जाएंगे... मुझे पूरा विश्वास है कि देश की जनता ने आदरणीय मोदी जी पर जितना भरोसा जताया है, जितना उन्हें काम करने का मौका दिया है, जितना ऐतिहासिक निर्णय को देखा है, उसे वह 2019 में जरुर समझेगी और उस समय असली फैसला होगा|

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