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डॉ. मनमोहन सिंह जी, आपकी योग्यता का उपयोग ही नहीं हुआ

हाल में देश के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आलोचनात्मक लहजे में कहा कि वह सिर्फ भारत के एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर ही नहीं, थे, बल्कि देश के एक्सीडेंटल वित्त मंत्री भी थे। पूर्व प्रधानमंत्री का ये बयान आलोचनात्मक और व्यंग्यात्मक राजनीति भरा है, मुझे पता है। लेकिन मुझे इस पर कहना है कि डॉ. मनमोहन सिंह साहब, आप बहुत प्रतिभावान हैं, अनुभवी भी हैं, एक्सीडेंटल वित्त मंत्री नहीं, बल्कि आप अर्थशास्त्र की बहुत अच्छी जानकारी रखते हैं, लेकिन हकीकत तो ये है कि आपकी प्रतिभा को कांग्रेस नेतृत्व ने कभी इस्तेमाल ही नहीं होने दिया। आपको मुखौटा बनाकर सारे फैसले किसी और ने लिए... आपको केवल एक साइनिंग अथॉरिटी बनाकर रखा गया।
दूसरा विषय कि पूर्व प्रधानमंत्री ये कहते हैं कि वह हर विदेशी यात्रा के बाद मीडिया से मुखातिब होते थे जबकि मोदी जी ऐसा नहीं करते। इस पर मैं कहूंगा कि आप मौजूदा प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के रिकॉर्ड को अच्छे से ज़रा देखिए, वह हिन्दुस्तान ही नहीं बल्कि विदेशी मीडिया तक से रू-ब-रू होते हैं। लाइव बातें करते हैं... उस दौरान मीडिया क्या, सीधे पब्लिक उनसे सवाल-जवाब कर सकते हैं। आप किस दुनिया में हैं डॉ. मनमोहन सिंह साहब।
एक विषय आज में जोड़ना चाहूंगा कि हाल में पाकिस्तानी जेल में 6 साल बिताकर भारत लौटे हामिद नेहाल अंसारी ने विदेश मंत्री आ. सुषमा स्वराज जी से मुलाकात की। उनकी वतन वापसी में केंद्रीय मंत्री का महत्वपूर्ण योगदान रहा है, इसलिए बुधवार सुबह जब हामिद ने परिवार के साथ सुषमा से मुलाकात की तो वे काफी भावुक दिखे। इस दौरान हामिद की मां ने कहा, 'मेरा भारत महान, मेरी मैडम महान, सब मैडम ने ही किया है।' हामिद नेहाल अंसारी ने हिन्दुस्तान वापस लौटकर कई वाकये स्पष्ट किए। बताए कि उनके केस के दूसरे दो अहम किरदारों की एंट्री होती है। एक रख्शंदा नाज और दूसरे काजी मोहम्मद अनवर। दोनों ही पाकिस्तान के ह्यूमन राइट वकील हैं। हामिद का मामला जब इनके सामने पहुंचा को वह काफी बिगड़ चुका था। दरअसल 12 दिसंबर 2015 को पाकिस्तान की एक मिलिटरी अदालत ने हामिद को जासूसी और पाकिस्तान विरोधी गतिविधियों का दोषी ठहरा दिया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रख्शंदा नाज और काजी मोहम्मद अनवर को पहली नजर में ही यकीन हो गया कि हामिद निर्दोष है। इसके बाद दोनों ने हामिद के परिवार से बिना एक पैसा लिए इस केस को अपने स्तर पर लड़ा। एक तरफ काजी मोहम्मद अनवर लगाकार इस केस में भिड़े रहे और कोर्ट को समझाते रहे कि हामिद जासूस नहीं है। वहीं रख्शंदा नाज ने कोर्ट के इतर एक मां की तरह हामिद का ख्याल रखा। वह अक्सर जेल में हामिद से मिलने जातीं तो उनके लिए खाने का सामान ले जातीं। पाकिस्तान में इन दोनों के अलावा सिविल राइट ऐक्टिविस्टों और अन्य जर्नलिस्टों ने भी काफी मदद की। इनमें एक नाम जर्नलिस्ट जीनत शहजादी का भी रहा। हामिद की मां फौजिया ने अपने बेटे की रिहाई के लिए जीनत से संपर्क साधा था। बाद में जीनत पेशावर जेल में बंद हामिद के केस पर काम करने के दौरान खुद गायब हो गईं थीं। दो साल बाद जीनत को ढूंढने में कामयाबी मिली थी। बाद में बताया कि जीनत को अगवा कर लिया गया था। मैं इंसानियत के नाते उन तमाम लोगों को शुक्रिया कहता हूं जिन्होंने हामिद की मदद की और कहना चाहता हूं कि कोई सीखे इंसानियत के नाते कैसे किसी के हक में निःस्वार्थ तरीके से लड़ाई लड़ी जाती है।

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