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हमें स्वस्थ राजनीति का परिचायक बनना होगा

आज मीडिया में चल रहे कुछ विषय को लेकर कुछ कहना चाहता हूं। सबसे पहली बात की हाल में देश के यशस्वी प्रधानमंत्री आदरणीय श्री नरेंद्र भाई मोदी जी ने देश को संबोधित करते हुए मीडिया से कुछ सवाल पूछे। उन्होंने कुछ प्रमुख योजनाओं और देश के विकास के कुछ हाल के महत्वपूर्ण आंकड़ों का उदाहरण देते हुए उन्हें उनके कर्तव्यों पर अडिग रहते हुए कार्य करते रहने की प्रेरणा दी। मेरे कहने का तात्पर्य केवल इतना है कि मीडिया में कुछ वक्तव्यों को इस तरह बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाता है और कुछ गंभीर विषय को इतना दबा दिया जाता है कि यह पक्षपात रवैया की ओर इशारा करने लगता है।
दूसरा विषय आज मैं एक अपील के रूप में कहना चाहता हूं कि स्वार्थ के लिए किसी के साथ जुड़ते हैं और मौसम को बस देखकर और उसका अनुमान लगातर जनता के बीच दूसरा मुखौटा लगाकर जाते हैं तो ये स्वस्थ राजनीति का हिस्सा कभी नहीं कहा जा सकता। मैं बार-बार कहता हूं कि आप राजनेता हों या राजनीतिक दल,सबसे पहले एक विचारधारा रखते हैं जिस पर आप चुनाव लड़ते हैं, गलत को विरोध करते हैं, किसी का समर्थन करते हैं, या कुछ और... लेकिन इस विचारधारा को अलग हम बदलते रहेंगे तो एक दिन ये ‘वक्त’ हमें बदल देगा... इसलिए देश के इस सबसे बड़े लोकतंत्र में देश को सुधारने की कसमें खाइए, केवल जोड़-तोड़ के आधार पर विचारधारा मत बदला करें... मैं किस संदर्भ में कह रहा हूं, मुझे नहीं लगता, इसे बहुत अधिक स्पष्ट करने की ज़रूरत है।

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