Skip to main content

'द ग्रेट सियासी ड्रामा' के संचालन में आप सभी का स्वागत है


आज यह शीर्षक मुझे इसलिए देनी पड़ी, क्योंकि पिछले 2 दिनों से मध्यप्रदेश और राजस्थान को लेकर जिस तरह सियासी ड्रामा मचा हुआ है, वह निंदनीय है और और अलोकतांत्रिक है... कांग्रेस के प्रवक्ता टीवी चैनलों पर उसे लोकतंत्र का हिस्सा बताते हैं, लेकिन मैं उसे एक परिवारवाद का हिस्सा बताता हूँ... लोकतांत्रिक प्रक्रिया में तो एक विधायक दल का नेता उसका विधायक दल चुनता है... लेकिन कांग्रेस में ऐसा नहीं होता कांग्रेस में विधायक दल केवल औपचारिकता भर होती है आलाकमान सब कुछ तय करते हैं एक परिवार की अदालत लगती है उसमें एक परिवार अंतिम परिणाम देता है और उसे विधायक दल के बीच जाकर खानापूर्ति करके सुना दिया जाता है कि परिवार द्वारा यह फैसला ले लिया गया है और किसी विधायक दल में हिम्मत नहीं होती कि इस पर सवाल उठा पाएं... या कांग्रेस की परंपरा रही है और देश ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री चुनने में इसका प्रत्यक्ष उदाहरण पहले की तरह देख भी लिया ... सब कुछ एक परिवार बैठकर तैयार करती है... नाम तय हो जाता है और फिर जनता के बीच मुखौटा प्रस्तुत करने के लिए उन्हें दिल्ली से भोपाल इसलिए भेजा जाता है कि आप विधायक दल के बीच जाकर अपनी अब औपचारिकता भर पूरी कर लीजिए, नाम तो पहले से तय हो चुका है और कांग्रेस के लोग भोपाल में जाकर कमलनाथ जी के नाम का एलान कर देते हैं... यही है कांग्रेस का आंतरिक लोकतंत्र... यह उस कांग्रेस की विचारधारा नहीं हो सकती जिसके बैनर तले आजादी की लड़ाई लड़ी गई थी...

आज गांधी के नाम पर देश को गुमराह कर रही यह कांग्रेस वोट तो जनता से कांग्रेस के नाम पर मांगती है लेकिन जीत के बाद सारे फैसले खुद आलाकमान बन कर लेती है मुख्यमंत्री का चेहरा किसी और को बताया जाता है और बाद में इनकी राजमहल में एक परिवार बैठकर तय करती है इकॉन गद्दी पर बैठेगा और कौन नहीं... हमारी पार्टी के माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष आदरणीय अमित शाह जी हैं लेकिन आदरणीय अमित शाह जी के बाद कौन राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगे, इसकी जानकारी किसी को नहीं है लेकिन कॉन्ग्रेस एक ऐसी पार्टी है जिसमें सोनिया गांधी जी के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष कौन होगा, इस पर किसी को सवाल खड़ा करने की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि उन्हें पता है आज की कांग्रेस पर एक परिवार का वर्चस्व हो चुका है... और इस पर जो सवाल खड़ा करेगा उसे पार्टी से अविलंब बाहर कर दिया जाएगा...

लेकिन मैं इन सब के बीच दुख यह प्रकट करना चाहता हूं कि हमारे देश की जनता बहुत भोली भाली है... वह अक्सर लोकलुभावन में आकर ऐसे फैसले ले लेती है, लेकिन बाद में उसे पूरा ना होते देख हतोत्साहित भी हो जाती है... मुझे कांग्रेस पार्टी पर धिक्कार है कि आपने आजादी के बाद 60 वर्षो से अधिक तक देश को गुमराह करने का काम किया और यही काम आप फिर से कर रहे हैं...

Comments

Popular posts from this blog

किसानों पर कांग्रेस का छलावा अब उजागर

आज सुबह सुबह मध्य प्रदेश की एक ऐसी खबर पर नजर गई जो कांग्रेस एवं तमाम विपक्षी दलों के झूठ और किसानों को दिए झाँसे की पोल खोल कर रख देती है... झूठ के बल पर जहां कांग्रेस ने हाल में कुछ राज्यों में सरकारें बना ली, वहीं जब सच में किसानों का कर्ज माफी की बात सामने आ रही है तो नतीजा गोलमाल और हेराफेरी सा प्रतीत हो रहा है... मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले में किसान ऋण माफी की प्रक्रिया शुरू होते ही 76 कृषि साख सहकारी समितियों में हुए घोटाले की परतें खुलने लगी हैं। समितियों की ओर से पंचायत पर ऋणदाताओं की सूची चस्पा की तो ऐसे किसान सामने आए, जिन्होंने ऋण लिया ही नहीं, लेकिन वह कर्जदार हैं। किसानों ने जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की शाखा व समितियों पर पहुंच कर आपित्त दर्ज कराई है। किसानों का कहना है कि जब बैंक से कर्ज लिया ही नहीं तो माफी कैसी? जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की ओर से किसानों को फसल के लिए ऋण साख सहकारी समितियों के माध्यम से दिया जाता है। पिछले दस साल में बिना कागजी कार्रवाई किए 120 करोड़ का फर्जी ऋण वितरण किया गया। वर्ष 2010 में ऋण वितरण घोटाला सामने आया था, लेकिन तत्कालीन भाजपा...

राहुल जी, अब आपको देश के सामने सिर झुकाकर माफी मांगनी चाहिए

आज CAG की बहुप्रतीक्षित रिपोर्ट संसद में पेश कर दी गयी जिसमें कीमत का खुलासा किये बिना कहा गया है कि यह सौदा पूर्ववर्ती संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के समय किए गए सौदे से कुल मिलाकर 2.86 फीसदी सस्ता है। तो क्या ये मान लिया जाए कि कांग्रेस के अध्यक्ष श्रीमान राहुल गांधी जी का गैर-जिम्मेदाराना रवैये ने राजनीतिक फायदे और वोट-बैंक के लिए देश को एक ऐसे भ्रम में रखा, जिसने देश की साख को धूमिल करने का कार्य किया है। लेकिन मैं राहुल जी को यही कहना चाहता हूं कि अगर आपको सीएजी की रिपोर्ट को भी अब झूठा समझना है तो समझिए, लेकिन अब आपको अपनी हरकतों के एवज में देश के सामने सिर झुकाकर माफी मांगनी चाहिए। मैं मानता हूं कि शब्द ब्रह्म है। वो तीर है जो निकलने के बाद कभी वापस नहीं आते। यहां तो राहुल जी के कृत्य से पूरे हिन्दुस्तानवासियों को फ्रांस ही नहीं बल्कि विश्वभर में रह रहे हिन्दुस्तानियों को वहां की सरज़मीं पर सिर को शर्म से झुकाना पड़ा होगा। राहुल जी, अब तो आपके माफी मांगने से वो पल भी नहीं लौटेगा।  राहुल जी, लेकिन इसमें गलती आपकी नहीं है, आपके सिपहसालारों की है, जो समय-समय पर अपने क...

गठबंधन नहीं, "ठगबंधन"

आज हर समाचार पत्र में  सपा- बसपा के गठबंधन की खबर है... मेरा मानना है यह गठबंधन नहीं ''ठगबंधन'' है...  लेकिन इन सबके बीच  यही कहना चाहता हूँ कि वर्ष 2019 का चुनावी युद्ध सदियों तक असर छोड़ने वाला है और ये चुनाव वैचारिक युद्ध का चुनाव है। दो विचारधाराएं आमने-सामने खड़ी हैं। आगामी चुनाव भारत के गरीब के लिए बहुत मायने रखता है। स्टार्टअप को लेकर निकले युवाओं के लिए ये चुनाव मायने रखता है। करोड़ों भारतीयों, जो दुनिया में भारत का गौरव देखना चाहते हैं, के लिए ये चुनाव मायने रखता है। एक-दूसरे का मुंह न देखने वाले आज हार के डर से एक साथ आ गए हैं, वो जानते हैं कि अकेले नरेंद्र मोदी जी को हराना मुमकिन नहीं है। 2014 के चुनाव में हम इन दलों को पराजित कर चुके हैं और आगे भी इन्हें पराजित करेंगे। भाजपा गरीबों के कल्याण और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को आगे बढ़ा रही है, जबकि विपक्षी दल केवल सत्ता के लिए साथ आ रहे हैं। 5 साल के अंदर भाजपा का गौरव ‘दिन दुनी’ गति से बढ़ा है। भाजपा का नयी दिल्ली में चल रहे अधिवेशन पर मेरा कहना है कि ये भारतीय जनता पार्टी के देशभर में फैले कार्यकर्ताओं के लि...