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कदम मिलाकर चलना होगा

हाल में पांच राज्यों के चुनाव परिणाम आने के बाद अक्सर सोशल मीडिया पर कुछ लोगों द्वारा यह सवाल पूछा जाता है कि 2019 में मोदी जी की लहर पर क्या असर पड़ने वाला है? इस विषय पर मेरा अपना निजी मंतव्य है... सबसे पहली बात जो मैंने पहले भी कहा है कि जिन राज्यों की यह चुनाव थे, वहां की जनता अपने राज्य के मुखिया को चुनती है... राज्य में विकास समेत कई मुद्दों पर वोट दिया जाता है और फिर विपक्ष में बैठकर आरोप लगाना और जनता को गुमराह करना आसान होता है... छत्तीसगढ़, राजस्थान और मध्य प्रदेश में हमारी सरकार थी और विपक्ष में बैठकर कांग्रेस ने जिस तरह से जनता को दिग्भ्रमित करने का काम किया, वह कुछ समय में जनता के बीच आ जाएगा, यह अलग मसला है... लेकिन हाल में आए परिणामों के बाद कांग्रेस पार्टी में मुख्यमंत्री पद को लेकर जिस तरह अलग-अलग राज्यों में रस्साकशी की होड़ मची हुई है| एक दूसरे के पक्ष में अनुशासनहीनता का डंका बजना शुरू हो चुका है, उसे देख कर जनता ताज्जुब में होगी...
हमारे विपक्षी दलों को इस बात का भी अहसास होना चाहिए कि मध्यप्रदेश में जहां बीजेपी और कांग्रेस के बीच केवल 10810 मतों का अंतर रहा, वहीं 415000 नोटा बटन दबाए गए राजस्थान में जहां बीजेपी और कांग्रेस के मतों का अंतर 155862 रहा, वहीं 534000 नोटा के बटन दबाए गए... कौन सा जश्न मना रहे हैं विपक्षी दल?

बहरहाल, सोशल मीडिया में चल रहे एक पोस्ट पर मैं प्रतिक्रिया देना चाहता हूं कि मेघालय हाई कोर्ट ने साफ कहा है, कोई भी भारत को इस्लामिक देश बनाने की कोशिश ना करें, वरना कयामत आ जाएगी... ऐसा किस दृष्टि में कहा गया होगा, इसका अंदाजा आप खुद लगा सकते हैं...

यह भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा रही है कि विपरीत परिस्थितियों में न घबराना और बहुत सफलता और खुशी के मौके पर भी अपनी मर्यादा का ख्याल रखना... स्व. अटल जी की वह पंक्ति मैं यहाँ दोहराना चाहता हूं...

बाधाएं आती हैं आएं
घिरें प्रलय की ओर घटाएं
पांव के नीचे अंगारे
सिर पर बरसें यदि ज्वालाएं
निज हाथों में हंसते-हंसते
आग लगाकर जलना होगा
कदम मिलाकर चलना होगा

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