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Showing posts from October, 2018

सरदार पटेल एक कर्मयोगी युगपुरूष थे

सरदार पटेल नेे समाज के सामाजिक , सांस्कृतिक , राजनैतिक , आर्थिक क्षेत्रों में अपनी अन्तिम श्वास तक कार्य किया। भारतीय संस्कृति , मूल्य और नैतिकता उनके पथ प्रदर्शक रहे। वे साहसी , वीर , दृढ़निश्चयी और असीम देशभक्त थे। कांग्रेस के वे नेता थे, नीति – निर्माता थे, संगठन कर्ता थे, अनेक विध आंदोलनों के सूत्रधार थे। उपप्रधानमंत्री बनने के बाद उनकी उत्तम प्रशासक की छवि निखर कर सामने आयी। लोकप्रिय सरदार वे स्पष्टवक्ता थे, बोलते समय ह्दय की गहराई से बोलते थे। आमसभा में भाषण करते समय वे जनसामान्य के मनको छूने वाली बात रखते थे। वे कितने लोकप्रिय रहे होंगे इस का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 3 जनवरी 1948 को उन्होंने कोलकाता एक सार्वजनिक सभा को संबोधित किया उसमें 10 लाख से अधिक लोग उपस्थित थे। आज तो आमसभा में लोगों को वाहनों से लाये जाने एवं भोजनादि का प्रबंध भी होता है पर उनदिनों इस प्रकार की व्यवस्थायें नहीं होती थीं। सरदार के प्रति जनप्रेम, जनादर , जनस्वीकृति का अनुमान इससे सहज ही लगाया जा सकता है। 12 मार्च 1930 में महात्मा गांधी जी ने नमक सत्याग्रह करने का निश्चय किया। अहमदाबाद के स...

श्री वल्लभभाई झावेरभाई पटेल : एकता की मूर्ति

आज 31 अक्टूबर है। श्री वल्लभभाई झावेरभाई पटेल जिनको देशवासी प्यार से ’सरदार’ या ’लौहपुरूष’ कहते हैं, उनका 143वाँ जन्मदिन है। सारा देश इस अवसर को ’’राष्ट्रीय एकता दिवस’’ के रूप में मनाता है। आज ही के दिन गुजरात में बड़ौदा के पास नर्मदा जिले में सरदार सरोवर बांध के समीप हिन्दुस्थान के प्रथम उपप्रधानमंत्री और गृहमंत्री रहे सरदार पटेल की 182 मीटर ऊँची प्रतिमा का लोकार्पण होने जा रहा है। देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी इसे देश और दुनिया को लोकार्पित करने जा रहे हैं। यह उन्हीं की कल्पना थी जिसे 2013 में उन्होंने इस आकार देना प्रारंभ किया। यह दुनिया की सबसे ऊँची मूर्ती रहेगी। अभी तक चीन की 120 मीटर ऊँचाई वाली स्प्रिंग बुद्धा मूर्ति एवं 90 मीटर ऊँची न्यूयार्क स्थित स्टैच्यू आॅफ लिबर्टी ही सबसे ऊँची मूर्ति मानी जाती रही है। इसका नाम ’एकता की मूर्ति’ (स्टैच्यू आॅफ यूनिटी) रखा गया है। इस मूर्ति के लिए देश के हर गांव से किसानों और मजदूरों से लोहा एकत्रित किया गया। केवल 42 महीने के रिकार्ड समय में यह कार्य पूर्ण होना वास्तव में अपने आप में मिशाल को दर्शाता है। संपूर्ण विश्व में यह प्रकल्प एक...

आज गांधी होते तो राहुल गांधी जी जैसों के कृत्य पर शर्मिंदा होते

कितना अफसोसजनक है कि जिस महात्मा गांधी जी ने जिस कांग्रेस की कल्पना की, जिसे सींचा... आज केवल उसके नाम पर एक परिवार देश की छवि को दुनिया में धुमिल करने का काम कर रही है। यह झूठ और बेशर्मी की हद नहीं तो क्या है कि मध्य प्रदेश चुनाव में राहुल गांधी खुलेआम वहां के मुख्यमंत्री आदरणीय श्री शिवराज सिंह जी के पुत्र का नाम पनामा मामले से जोड़ते हैं और जब मुख्यमंत्री जी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी देते हैं तो जवाब में राहुल गांधी जी ये कहते हैं कि वह कन्फ्यूज हो गए थे। ये क्या है ? राहुल गांधी   जी, ये आपका कैसा बचपना है कि आप भरी पब्लिक में भाषण देते हैं, आरोप लगाते हैं और फिर माफी मांग लेते हैं। और तो और राहुल गांधी को यू-टर्न बयान का भी अंदाज देखिए कि अपनी गलती मानते हुए कहते हैं कि भाजपा में इतना भ्रष्टाचार है कि वह कल कन्फ्यूज हो गए। राहुल जी, असल में आपने 70 वर्षों के अपने शासन में देश को कन्फ्यूज कर रखा था। मैं इस विषय पर सहमति व्यक्त कर रहा हूं कि पिछले कई वर्षों से मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे भाजपा शासित कई राज्यों के मुख्यमंत्री और उनके परिवार पर कांग्रेस अनर्गल आरोप लगाती...

कांग्रेस नेताओं के बिगड़े बोल उनके संस्कारों का परिचायक

कांग्रेस नेताओं के बिगड़े और बकवास बोल उनकी आज की आदत नहीं है ,   पुरानी फितरत है। शशि थरूर ने फेस्टिवल में अपनी किताब पर बात करते हुए देश के सम्मानित प्रधानमंत्री पर जिस तरह के बोल बोले ,   ये उनके संस्कार का परिचायक है। कांग्रेस हिंदू देवी-देवताओं का अपमान कर रही है ,   जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कांग्रेस की हताशा का परिणाम है कि वह प्राथमिक स्तर की मर्यादा भूल गई है। चुनाव नजदीक आते ही आदरणीय प्रधानमंत्री  पर अभद्र टिप्पणी की जा रही है। जनता सब देख रही है। वे आदरणीय पीएम पर जितने हमले करेंगे ,   देश के माननीय पीएम उतने ही मजबूत होकर उभरेंगे। कांग्रेस नेता शशि थरूर ने तो अपनी सभी सीमाएं ही लांघ दी हैं। कांग्रेस नेताओं को कौन समझाए कि माननीय प्रधानमंत्री आदरणीय नरेंद्र मोदी जी ने जब 2014 में भारत की जिम्मेदारी संभाली थी ,  उस वक्त वर्ल्ड बैंक द्वारा जारी ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (व्यापार करने में सुलभता) में भारत की रैंकिंग 140 थी ,  लेकिन अब यह 100 पर पहुंच गई। और इसका विवरण कोई छुपी-छुपाई एजेंसी नहीं ,  बल्कि खुद जापान से मा...

विश्व का सबसे ऊंचा रेल मार्ग अब हिन्दुस्तान में

मुझे जानकर बहुत प्रसन्नता हुई कि रेलवे ने प्रस्तावित किया है कि भारत - चीन सीमा से लगती इसकी सामरिक रूप से महत्वपूर्ण बिलासपुर - मनाली - लेह लाइन को राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया जाना चाहिए। यह विश्व का सबसे ऊंचा रेल मार्ग होगा। दिल्ली से लेह जाने के लिए अभी 40 घंटे लगते हैं , लेकिन इस लाइन के तैयार होने के बाद सिर्फ 20 घंटे लगेंगे।   बड़े शहरों में मेट्रो रेल के कई स्टेशन सुरंगों के अंदर हैं , अब जल्द ही भारतीय रेल का एक रेलवे स्टेशन सुरंग के अंदर तैयार होगा। एक खास प्रोजेक्ट के तहत हिमाचल प्रदेश की बिलासपुर - मनाली - लेह लाइन पर केलांग में सुरंग के अंदर रेलवे स्टेशन बनाया जाएगा। यह सुरंग 27 किमी लंबी होगी और स्टेशन 3000 मीटर की ऊंचाई पर होगा। फिलहाल इस प्रोजेक्ट के लिए पहले चरण का सर्वे किया जा रहा है।   केलांग कस्बा लाहौल और स्पीती जिले का प्रशासनिक केंद्र है। यह मनाली से 26 किमी इंडो - चीन बॉर्डर से महज 120 किमी दूर है।...

अमृतसर हादसे में दोषियों को सजा मिले

अमृतसर में जोड़ा फाटक के पास हादसे में 62 लोंगों के मारे जाने के मामले में मेरा मानना है कि इसकी जिम्मेदारी तय करनी चाहिए , ताकि ऐसी घटना दोबारा न हो। और यह कहने मुझे झिझक नहीं है कि कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू की पत् ‍ नी डॉ . नवजोत कौर सिद्धू के खिलाफ केस दर्ज किया जाना चाहिए। आखिरकार , जिस कार्यक्रम   के दौरान यह भीषण हादसा हुआ उसमें डॉ . नवजोत कौर मुख् ‍ य अतिथि थीं। डॉ . सिद्धू के खिलाफ काफी साक्ष्य मौजूद हैं। यह दुर्घटना नहीं बल्कि मानव निर्मित घटना है , इसीलिए आयोजकों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। घटना की पूरी विश्व भर में निंदा हो रही है , इसके बाजवूद डिवीजनल कमिश्नर से जांच करवाने की बात करके सरकार ने मामले पर पर्दा डालने की कोशिश की है। लेकिन कितना दुखद है कि स्थानीय निकाय मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू इस मामले में रेलवे को जिम्मेदार बता रहे हैं। वह इतने लोगों की जान जाने पर यह कह रहे हैं कि यह एक हादसा था , ...