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देश का आदरणीय प्रधानमंत्री जी में विश्वास और बढ़ा

मुझे बहुत प्रसन्नता है कि देश ने एक बार फिर से यशस्वी प्रधानमंत्री आ. नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भरोसा दिखाने का दंभ भरा है। दरअसल, एक सर्वे में देश की राजधानी दिल्ली की जनता ने एक सिरे से साफ कर दिया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नाम पर आज भी चुनाव लड़ेंगे तो विपक्ष के सारे फॉर्मूले फेल हो जाएंगे। दिल्ली की सातों लोकसभा सीटों के आधार पर इस सर्वेक्षण की रिपोर्ट तैयार की गई है। यह दिखाता है कि हमारे माननीय प्रधानमंत्री जी लोकप्रियता आज भी हिन्दुस्तान में रहने वालों के दिलों में बसता है।
दूसरा मैं अपने ब्लॉग के माध्यम से प्रधानमंत्री जी के उस वक्तव्य का समर्थन करता हूं जिसमें उन्होंने भारत-पाकिस्तान बंटवारे के वक्त की कांग्रेस की गलतियों को गिनाया। माननीय प्रधानमंत्री जी ने कहा कि इन्हीं गलतियों में से एक करतारपुर है। गुरुनानक देव की भूमि बंटवारे में पाकिस्तान में चली गई, क्योंकि कांग्रेस ने इस पर ध्यान नहीं दिया। यह हकीकत है कि विभाजन के वक्त अगर कांग्रेस नेताओं में इस बात की थोड़ी भी समझदारी, संवेदनशीलता और गंभीरता होती तो तीन किलोमीटर की दूरी पर हमारा करतारपुर हमसे अलग नहीं होता। सत्ता के मोह में कांग्रेस पार्टी ने इतनी गलतियां की हैं जिनको आज पूरे देश को भुगतना पड़ रहा है। आ. मोदी जी की सरकार ने हाल ही में कैबिनेट बैठक में करतारपुर कॉरिडोर बनाने को मंजूरी दी। इसका निर्माण गुरदासपुर के डेरा बाबा नानक से पाकिस्तान से सटी अंतरराष्ट्रीय सीमा तक किया जाएगा।
ब्लॉग के आखिर में मैं हृदय की गहराई से बुलंदशहर जैसी घटना के प्रति शोक व्यक्त करता हूं और ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि देश में अमन चैन बना रहे। और यह हर एक मानव समाज की जिम्मेदारी है कि वह अपने कर्मों के प्रति कर्तव्यनिष्ठ हों, शांति का माहौल फैलाएं, असामाजिक तत्वों से सावधान रहें।

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किसानों पर कांग्रेस का छलावा अब उजागर

आज सुबह सुबह मध्य प्रदेश की एक ऐसी खबर पर नजर गई जो कांग्रेस एवं तमाम विपक्षी दलों के झूठ और किसानों को दिए झाँसे की पोल खोल कर रख देती है... झूठ के बल पर जहां कांग्रेस ने हाल में कुछ राज्यों में सरकारें बना ली, वहीं जब सच में किसानों का कर्ज माफी की बात सामने आ रही है तो नतीजा गोलमाल और हेराफेरी सा प्रतीत हो रहा है... मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले में किसान ऋण माफी की प्रक्रिया शुरू होते ही 76 कृषि साख सहकारी समितियों में हुए घोटाले की परतें खुलने लगी हैं। समितियों की ओर से पंचायत पर ऋणदाताओं की सूची चस्पा की तो ऐसे किसान सामने आए, जिन्होंने ऋण लिया ही नहीं, लेकिन वह कर्जदार हैं। किसानों ने जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की शाखा व समितियों पर पहुंच कर आपित्त दर्ज कराई है। किसानों का कहना है कि जब बैंक से कर्ज लिया ही नहीं तो माफी कैसी? जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की ओर से किसानों को फसल के लिए ऋण साख सहकारी समितियों के माध्यम से दिया जाता है। पिछले दस साल में बिना कागजी कार्रवाई किए 120 करोड़ का फर्जी ऋण वितरण किया गया। वर्ष 2010 में ऋण वितरण घोटाला सामने आया था, लेकिन तत्कालीन भाजपा...

डॉ. मनमोहन सिंह जी, आपकी योग्यता का उपयोग ही नहीं हुआ

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