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Showing posts from March, 2019

मसूद अजहर को क्यों बचा रहा है चीन?

चीन के पाकिस्तान में आर्थिक हित हैं, जिन्हें मसूद अजहर से खतरा है. चीन मसूद अजहर को खुश करने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है. लेकिन सवाल ये उठता है कि चीन को अगर मसूद अजहर से डर लगता है, तो आर्थिक हितों के मामले में नई दिल्ली से क्यूं नहीं डरना चाहिए ? संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक बार फिर चीन ने अड़ंगा लगाकर जैश ए मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित होने से बचा लिया. बुधवार को चीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में मसूद अजहर को ग्लोबल टेरेरिस्ट घोषित करने के प्रस्ताव पर को तकनीकी रूप से स्थगित रखने का अड़ंगा लगाया. 2009 से अब तक यह चौथा मौका है, जब चीन मसूद अजहर की ढाल बना है. अपने देश में नमाज और दाढ़ी तक पर रोक लगाकर इसलाम की नई परिभाषा तैयार कर रहे चीन को मसूद अजहर से इतना प्रेम क्यों है. इस सवाल का जवाब यही है कि चीन एक दोगला और साम्राज्यवादी देश है. वह अपने हितों के लिए दुनिया की शांति की भी बलि चढ़ा सकता है. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में 1267 अल कायदा प्रतिबंध समिति के तहत मसूद अजहर को लाने का ये प्रस्ताव भारत ने नहीं, फ्रांस, ब्रिटेन और अमे...

संघ का लोकतंत्र बनाम कॉन्ग्रेस पार्टी प्राइवेट लिमिटेड- संस्कार कहाँ से लाओगे?

कॉन्ग्रेस पार्टी बेशक ‘संघ’ से पुरजोर नफरत करती हो, लेकिन वह संघ के मायने और ताकत भी समझती है, और इसीलिए एक संघ जैसा ही संगठन कॉन्ग्रेस पार्टी में भी चलता है, जिसे ‘सेवा दल’ के नाम से जाना जाता है। लेकिन सब कुछ चाहत, लालच और महत्वकांक्षाओं से ही नहीं होता, कुछ बातों और इरादों को फलीभूत करने के लिए ‘संस्कारों’ की भी जरूरत होती है, जो कि नेहरू-गाँधी परिवार को छू कर भी नहीं गए। यही वजह है कि लगभग आरएसएस के साथ ही स्थापित हुआ ‘सेवा दल’ का आज मात्र इतना काम रह गया है है कि इसका अध्यक्ष कॉन्ग्रेस के स्थापना दिवस के दिन, कॉन्ग्रेस के मुख्यालय में, कॉन्ग्रेस पार्टी के अध्यक्ष बल्कि गाँधी परिवार के वारिस को सूत की माला पहनाता है और उन्हें सलामी देता है, बाकी साल भर इसका अध्यक्ष और इनका संगठन, कॉन्ग्रेस शासित राज्यों में दलाली और उगाही करता है। जबकि संघ की ताकत और सिस्टम देखिए कि आज अगर भाजपा, कॉन्ग्रेस पार्टी की तरह एक वंश से संचालित पार्टी नहीं बन सकी है तो उसके मूल में संघ का ‘अंकुश’ है। संघ का मुखिया कभी भाजपा मुख्यालय में भाजपा अध्यक्ष को सैल्यूट मारने नहीं जाता है, बल्कि आवश्यकता...

हमला और बदला

वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमला हुआ 11 सितम्बर, 2001 को और अमेरिका ने बदला लेने के लिए अफगानिस्तान में ऑपरेशन शुरू किया 7 ऑक्टूबर, 2001 को। यानि अटैक के लगभग 1 महीने बाद, जो कि 17 दिसम्बर,2001 तक अफगानिस्तान में चला। अमेरिका ने तालिबान की जड़ें काटी लेकिन हमले का मास्टरमाइंड लादेन मारा गया 1 मई, 2011 को यानि अटैक के लगभग 10 साल बाद।अमेरिका जैसे विश्व की महाशक्ति कहे जाने वाले राष्ट्र को भी बदले की कार्यवाही शुरू करने में लगभग 1 महीना लगा और खत्म करने में लगभग 10 साल .....और वो भी तब जबकि पूरा अमेरिका, वहाँ का विपक्ष एक साथ अपने राष्ट्रपति के साथ खड़ा था, कहीं कोई विरोध नहीं था। सबने एक-दूसरे का मनोबल बढ़ाया था, इस घोर संकट के समय में भी अपने जनजीवन को सामान्य बनाये रखा था, अपने आप को इस आघात के मानसिक दुष्प्रभाव से दूर रखने के लिए अपने परिवार के साथ छुट्टियाँ मनाने की, पार्कों में जाने की, टूअर प्रोग्राम बनाने की सार्वजनिक अपील की गई थी। क्योंकि उन्हें अपना नहीं, अपने शत्रु का मनोबल तोड़ना था। ये एक मनोवैज्ञानिक आक्रमण था अपने शत्रु पर, उन्हें साबित करना था कि तुम कुछ भी कर लो पर हमारी हि...

आतंक पर अंतिम जंग

लोकतंत्र के महापर्व यानि लोकसभा चुनावों की घोषणा के पूर्व ही पुलवामा में अत्यंत कायराना आतंकी हमले से देशवासियों की मनोदशा व राजनीतिक माहौल दोनों ही बुरी तरह बदल चुके हैं। देश में देशभक्ति का ज्वार उफान पर है और देशवासी अब आतंकियों व पाकिस्तान के खिलाफ आरपार की जंग के पक्ष में आ चुके हैं। जवाबी कार्यवाही के रूप में भारतीय वायुसेना ने पाक अधिकृत कश्मीर के बालकोट में आतंकी शिविरों पर किये बड़े हमले में सैंकड़ों आतंकियों को नेस्तनाबूद कर जंग का उद्घोष कर दिया है। पाकिस्तान जानता है कि प्रत्यक्ष युद्ध में वह भारत को नहीं हरा सकता, इसलिए उसने सन 71 की अपमानजनक हार के बाद गुरिल्ला युद्ध का सहारा ले रखा है और जब तब भारत में आंतरिक अशांति फैलाने वाले कार्य करता रहता है। यह होना स्वाभाविक भी है। तिनके तिनके जोड़कर हर भारतीय ने विभाजन के दंश के बाद मिली आजादी के बाद पिछले 72 सालों में अनेक झंझावात झेलते हुए देश को आगे बढ़ाया है और आज जब देश के प्रत्येक गांव में विकास की लहर पैदा हुई है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम व काम सराहा जाने लगा है, ऐसे में हर हिंदुस्तानी को लगने लगा है कि अगर...

आज का नया भारत बहुत कुछ कह्ता है ............

वो नया भारत है जो पुराने मिथक तोड़ रहा है, ये वो भारत है जो नई परिभाषाएं गढ़ रहा है, ये वो भारत है जो आत्मरक्षा में जवाब दे रहा है ये वो भारत है जिसके जवाब पर विश्व सवाल नहीं उठा रहा है ।  पुलवामा हमले के जवाब में पाक स्थित आतंकी ठिकानों पर एयर स्ट्राइक करने के बाद अब भारतीय सेना का कहना है की आतंकवाद के खिलाफ अभी ऑपरेशन पूरा नहीं हुआ है। ये नया भारत है जिसने  एक कायराना हमले में अपने 44 वीर जवानों को खो देने के बाद केवल उसकी कड़ी निंदा करने के बजाए उस  की प्रतिक्रिया की और आज इस नए भारत की ताकत को विश्व महसूस कर रहा है ।  आज विश्व इस न्यू इंडिया को केवल महसूस ही नहीं कर रहा बल्कि स्वीकार भी कर रहा है। ये वो न्यू इंडिया है जिसने विश्व को आतंकवाद की परिभाषा बदलने के लिए मजबूर कर दिया । जो भारत अब से कुछ समय पहले तक आतंकवाद के मुद्दे पर विश्व में अलग थलग था आज पूरी दुनिया उसके साथ है। क्योंकि 2008 के मुंबई हमले के दौरान विश्व के जो देश इस साजिश में पाक का नाम लेने बच रहे थे आज पुलवामा के लिए सीधे सीधे पाक को दोषी ठहरा रहे है ।अमेरिका से लेकर ब्रिटेन तक हर दे...