पांच राज्यों के चुनाव के नतीजे से पहले जिस तरह से एग्जिट पोल के नतीजे सामने आ रहे हैं, उसने देश को यह विचार करने को जरूर विवश कर दिया है कि एग्जिट पोल में जैसा दिखाया जा रहा है, क्या वैसा ही हकीकत में कुछ होने वाला है ? जिन राज्यों में चुनाव थे क्या वहां की जनता ने कांग्रेस नेतृत्व की पूर्ववर्ती यूपीए सरकार के कृत्यों और कई राज्यों में कांग्रेस की सरकार के कुशासन को भुला दिया है ? या कुछ मीडिया घराने जानबूझकर देश का ध्यान भटकाने के लिए एग्जिट पोल के आंकड़े के साथ हेरा-फेरी कर प्रस्तुत रहे हैं ? या विपक्षी दलों के इशारे पर कुछ मीडिया घराने जानबूझकर आ. मोदी जी सरकार की छवि धूमिल करने का प्रयास कर रही है ?
सवाल बहुत हैं और जवाब अगर ढूंढने की कोशिश करेंगे तो हमें सबसे पहले आदरणीय नरेंद्र मोदी जी की सरकार के साढे 4 वर्षों के सफर पर एक नजर डाली होगी... मुझे अच्छी तरह से याद है डॉ. मनमोहन सिंह जी जब यूपीए सरकार के दौरान प्रधानमंत्री थे, तब उन्हें आतंकवाद और काले धन पर अंकुश लगाने को लेकर नसीहत दी गई थी... और उन्हें उस बैठक में सलाह दी गई थी कि आप 500 और 2000 के रुपयों के ऊपर बैन लगाकर और नए नोट बाजार में लेकर चले आये तो कई सारी चुनौतियों से निपटा जा सकता है... मीडिया में भी यह बात बखूबी सामने आई, लेकिन देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री और वित्तीय मामलों के इतने बड़े जानकार डॉ. मनमोहन सिंह जी इतना बड़ा फैसला लेने की हिम्मत नहीं जुटा पाए, क्योंकि उन्हें पता था कि देश में इतने बड़े फैसले लेने से उनके वोट बैंक पर बड़ा असर पड़ सकता है... मैं यहां बस बताने की कोशिश कर रहा हूं कि जो काम वोट बैंक के लिए कांग्रेस नेतृत्व की सरकार हमेशा से करती रही और देशहित उनका सेकंड माइंडसेट था, वहीं आदरणीय नरेंद्र मोदी मोदी जी की सरकार ने देश हित में वोट बैंक को दरकिनार कर कड़े फैसले लिए और एक बार नहीं कई बार ऐसे ऐतिहासिक फैसले लिए, जिसने देश में क्रांतिकारी परिवर्तन लाए... परिवर्तन की ओर... आज देश सचमुच परिवर्तन देख रहा है... जो महात्मा गांधी स्वच्छता को सर्वोच्च गुण बताते थे, उस स्वच्छ भारत अभियान को लागू करने का काम आ. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने किया... जिस दौरान इन्होंने इस मिशन की शुरुआत की, यही विपक्षी दल थे जो कहते थे, कि बड़ी-बड़ी बातों को भूलकर और ये छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देकर झाड़ू लगवा रहे हैं... लेकिन आज पूरे देश में शौचालय और स्वच्छता को लेकर बड़ी क्रांति का प्रादुर्भाव हुआ...
सवाल उठता है कि क्या देश की जनता इन सब बातों को और कई ऐतिहासिक फैसलों को, कई ऐतिहासिक योजनाओं को, कई ऐतिहासिक चुनौतियों को, इस तरह दरकिनार कर सकती है भला ? जवाब है बिल्कुल नहीं... तो हकीकत में क्या है ? हकीकत यह है कि जैसे एग्जिट पोल का प्रेजेंटेशन हुआ, उससे साफ जाहिर है कि विपक्षी दल कुछ मीडिया घरानों पर अपना एक्सपेरिमेंट कर रही है और यह उनका एक्सपेरिमेंट उस वक्त विफल हो जाएगा, जब चुनाव के नतीजे 11 दिसंबर को सामने आ जाएंगे... इंतजार कीजिए...

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