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राफ़ेल पर फ़िर कांग्रेस का झूठ उजागर

राफेल विमान सौदे पर सुप्रीम की मुहर से कांग्रेस की झूठ का पर्दफ़ाश जो चुका है... पिछले एक साल से विभिन्न मंचों पर इस मुद्दे को उठाते हुए कांग्रेस ने झूठा माहौल बनाने की कोशिश की थी। पार्टी इस मुद्दे को लोकसभा चुनाव तक बरकरार रखना चाहती थी, ताकि वह प्रचार के दौरान भ्रष्टाचार का झूठा मुद्दा बनाकर सरकार को कटघरे में खड़ा कर सके।

और आश्चर्य तब होता है जब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि हम भले ही अभी राफेल की संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की मांग पर बरकरार हैं...

खुद कांग्रेस में कई नेता दबी ज़ुबान से इसे बिना जाने समझे उठाया गया मुद्दा समझते हैं...
कांग्रेस का यह झूठ बेनकाब तो होना ही था क्योंकि झूठ भले ही कुछ समय के लिए परेशान करें लेकिन झूठ की उम्र नहीं होती...  सत्य की विजय होकर रहती है लेकिन दुखद मसला यह है कि अगर कांग्रेस इसी तरह मौजूदा केंद्र सरकार को बदनाम करने के लिए ऐसे ईमानदार सौदों पर सवाल उठाती रहेगी तो भविष्य में अधिकारियों और सशस्त्र बलों को देश हित में भी ऐसी प्रक्रिया शुरू करने से पहले 10 बार सोचना पड़ेगा...

लेकिन एक दुखद मसले पर गौर कीजिए कांग्रेस की बचकानी हरकत के कारण गुरुवार को भी संसद का सत्र प्रभावित रहा हंगामा होते रहा अब आप सोच रहे होंगे कि हंगामा ही तो हुआ लेकिन आपको जानकर यह आश्चर्य होगा कि संसद के सत्र पर आने वाले खर्च का लेखा-जोखा मिनट और घंटों से तय होता है... हर 1 मिनट पर संसद के कार्यकाल पर ढाई लाख रुपए का खर्च आता है... और यही परिणाम रहा कि बीते वर्ष कांग्रेस के इस हंगामे के कारण संसद का सत्र बाधित रहा और 14 दिन में 73 करोड़ से अधिक रुपए की बर्बादी हुई... चलिए देश की जनता कांग्रेस के असली चेहरे को फिर से समझ रही हैं...

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