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आखिर कांग्रेस की मंशा क्या है

जब देश की 20% आबादी को 6000 रु हर माह फ्री मिलेगा तब कम से कम 25000 रु महीना के बिना देश की फैक्ट्री को लेबर ओर 1000 से 1200 रोज के बिना आपको दिहाड़ी लेबर नही मिलेंगे।और तब सरकारी पे स्केल मिनिमम आपको 72000 रु से शुरू करना पड़ेगा जिसका असर प्राइवेट सेक्टर पर भी आएगा।और इन सबका कुल मिला के असर आएगा बाजार और डेली नीड्स की चीजों पर ….
1 kg आटे की कीमत मिनिमम 90 से 100 रु होगी वो भी एवरेज क्वालिटी का और जब जीडीपी का करीब 14%नॉन प्रोडक्टिव एक्टिविटी पर खर्च होगा तो देश की अर्थव्यवस्था के नुकसान का आप अंदाजा भी नही लगा सकते।जब 20% पब्लिक को इतना पैसा फ्री मिलेगा तो उनमें से 15% लोग कभी कोई काम नही करेंगे ….इसका असर अगली पीढ़ी और समाज पर क्या होगा ये एक अलग विषय है।भारत की परिश्रमी कौम आने वाली पीढ़ियों तक अकर्मण्य आलसी ओर अपराधी बनेगीi काँग्रेस बताए कि क्या वो इन सब की जिम्मेदारी लेती है?आख़िर काँग्रेस कैसा भारत बनाना चाहती है?एक मेंटल पेशेंट को सर पर ढोती काँग्रेस देश को उस गर्त में डालना चाहती है जहाँ से भारत कभी नही निकलेगा।
 गरीबी  हटाओ…यह नारा  1947 से नेहरु, इन्दिरा और राजीव गांधी से लेकर राहुल गांधी तक आपने वोट बैंक  मजबूत बनाने के लिये कांग्रेस इस्तेमाल करती आ रही है।  मगर इससे गरीबी तो दूर नहीं हुई मगर अमीर गरीब का फासला बहुत  बढ़ गया है। अमीर ज्यादा अमीर और गरीब और ज्यादा गरीब हो गए ।    अब इसी चाल को कांग्रेस  के राहुल गांधी  ने पासा फेंका है कि देश के हर गरीब व्यक्ति को ₹6000 महीना और साल का ₹72000 दिया जाएगा । वैसे ही हमारे देश में एक रुपए किलो चावल देकर लोगों को निकम्मा बना दिया गया है । 
जो थोड़े बहुत पैसे बचते हैं उससे वह शराब पी के अपने और अपने परिवार का जीवन दूभर करते हैं और समय से पहले कम उम्र में मर जाते हैं । 
आज जब एक गरीब परिवार के 5 लोगों को ₹6000 महीना के हिसाब से ₹30000 महीना मिलेगा तो वह काम क्यों करेंगे । 
इस योजना से देश रसातल की ओर जाएगा और इस देश को बर्बाद होने से कोई नहीं बचा सकता । क्या हम टैक्सपेयर्स इसलिए टैक्स भरते हैं ताकि सरकार उन पैसों को गरीबों में मुफ्त में बांट सके , उन्हें बिना कोई रोजगार दिए।
कायदे से इन्हें यह घोषणा करनी चाहिए थी कि वह हर गरीब को रोजगार देंगे, उस रोजगार के बदले उनको ₹ 6000 महीना दिया जाएगा । इस तरह से लोग मेहनत भी करते और पैसे भी कमाते । लोगों को बैठे बिठाए बिना काम किये  ₹ 6000 प्रति महीना देने की जो योजना है , वह सिर्फ इस देश को बर्बादी की ओर ले कर जाएगी । अगर हिम्मत है किसी पार्टी में , तो वह यह घोषणा करें कि यह जो ₹ 6000 प्रति व्यक्ति प्रति महीना दिया जाएगा , वह पार्टी फंड से देंगे हम टैक्सपेयर्स अपने पैसे से इन लोगों को पैसे क्यों दें।
अब यह देखना है कि राहुल गांधी ने  कहा है अगर वो प्रधानमंत्री बने तो गरीबो को वो देंगे 72000 रुपये सालाना… चलो थोड़ा गुणा भाग करते है।…. 1,324,171,354 भारत की   जनसंख्या 27.5% लोग योजना आयोग के हिसाब से गरीबी रेखा के नीचे….मतलब…364,147,122.35 लोग। राहुल गांधी सबको देंगे प्रातिव्यक्ति 72000 रूपये मतलब …26,218,592,809,200 रूपये।  इधर भारत सरकार का पिछला कुल बजट व्यय था 21,47 लाख करोड़ रुपये । 
आप हिसाब फैलाते रहिए, अब पता लगाये.. यहा कौन सा घोटाला है  भाई…जो सरकार के खाते से देंगे । खुद तो टैक्स चोरी के इल्जाम मे जमानत पर है और दूसरो के खुन पसीने की कमाई से यह 6000/- हर महीने बांटेंगे..यह खानदानी लूटेरे….!  अगर इतना है तो वो अपनी पार्टी फंड से दे दे ।
पिछ्ले कुछ दिनों से कांग्रेस  सत्ता में आने के लिये नए से नए हथकण्डे अपना रही है । उसी कांग्रेस के लिये मन्दिरो मे जा रही है जो श्री राम को काल्पनिक कहते है और उनके बड़े नेता जो वकील कपिल सिबल श्री राम मन्दिर के खिलाफ केस लड़ रहे हैं ।  हद तो तब हुई जब प्रियंका ने आपने गले से हार उतारकर  शास्त्रि जी की प्रतिमा पे  डाला ….भला इससे ज्यादा क्या अपमान होगा । ऐसी  गन्दी राजनीति करने वाले लोगों  का क्या हश्र    होना चाहिए यह  आने वाले चुनाव में जनता का फैसला होगा ।

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