जिस दिन प्रियंका गांधी को कांग्रेस का औपचारिक रूप से महासचिव बनाया गया था , मुझे लगा था कि कांग्रेस में प्राण फूंकने और राहुल गांधी की एकरसता और मूर्खता से निपटने के लिए प्रियंका को लाया गया है । और कि ठीक ही लाया गया है । प्रियंका में संभावना भी बहुत देखी गई । लेकिन आज पता चला कि वह सारी कवायद तो राबर्ट वाड्रा के भ्रष्टाचार पर राजनीतिक पर्दा डालने की थी , रावर्ट वाड्रा को उबारने के लिए थी , कांग्रेस को उबारने की नहीं । दिल्ली में आज सुबह लगे राहुल , प्रियंका और रावर्ट वाड्रा के लगे पोस्टर भी यही चुगली खाते हैं , जो बाद में उतार दिए गए । लेकिन कांग्रेस इस में सफल होती फिलहाल तो नहीं दिख रही । आज शाम ई डी आफिस में राबर्ट वाड्रा को छोड़ कर फटाक से कांग्रेस महासचिव की कुर्सी पर जा कर बैठ जाना , फिर भाग कर ई डी आफिस रावर्ट वाड्रा को लेने आ जाना , बहुत ही बचकाना राजनीतिक कदम था प्रियंका का। अभी रावर्ट वाड्रा को ई डी के कई चक्कर लगाने हैं , तो प्रियंका राजनीति कब करेंगी , रावर्ट वाड्रा को अटेंड कब करेंगी। प्रियंका ने अपनी बाक़ायदा राजनीति का आज का पहला दिन बहुत ख़राब परफार्म किया । भ्रष्ट ही सही , पति उन की पहली प्राथमिकता होनी ही चाहिए। फिर वह राजनीति कब और किस मुंह से करेंगी। अदालत में जब जो होगा , तब होगा , अभी तो प्राथमिक साक्ष्य रावर्ट वाड्रा के खिलाफ ही दिख रहे हैं । सवाल है कि प्रियंका क्या सावित्री बन कर रावर्ट वाड्रा को भ्रष्टाचार से उबार लेंगी ? क्यों कि रावर्ट वाड्रा , सत्यवान तो नहीं हैं , परम भ्रष्ट हैं ।
हाल में देश के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आलोचनात्मक लहजे में कहा कि वह सिर्फ भारत के एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर ही नहीं, थे, बल्कि देश के एक्सीडेंटल वित्त मंत्री भी थे। पूर्व प्रधानमंत्री का ये बयान आलोचनात्मक और व्यंग्यात्मक राजनीति भरा है, मुझे पता है। लेकिन मुझे इस पर कहना है कि डॉ. मनमोहन सिंह साहब, आप बहुत प्रतिभावान हैं, अनुभवी भी हैं, एक्सीडेंटल वित्त मंत्री नहीं, बल्कि आप अर्थशास्त्र की बहुत अच्छी जानकारी रखते हैं, लेकिन हकीकत तो ये है कि आपकी प्रतिभा को कांग्रेस नेतृत्व ने कभी इस्तेमाल ही नहीं होने दिया। आपको मुखौटा बनाकर सारे फैसले किसी और ने लिए... आपको केवल एक साइनिंग अथॉरिटी बनाकर रखा गया। दूसरा विषय कि पूर्व प्रधानमंत्री ये कहते हैं कि वह हर विदेशी यात्रा के बाद मीडिया से मुखातिब होते थे जबकि मोदी जी ऐसा नहीं करते। इस पर मैं कहूंगा कि आप मौजूदा प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के रिकॉर्ड को अच्छे से ज़रा देखिए, वह हिन्दुस्तान ही नहीं बल्कि विदेशी मीडिया तक से रू-ब-रू होते हैं। लाइव बातें करते हैं... उस दौरान मीडिया क्या, सीधे पब्लिक उनसे सवाल-जवाब कर सकते हैं...

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