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कांग्रेस ने किसानों को सब दिन वोट बैंक समझा


आजकल एक विषय पर बहुत चिंतन करता हूं कि हाल में कुछ राज्यों पर कांग्रेस की जीत के बाद जिस तरह से किसानों का कर्ज माफ करने की वहां हवा- हवाई बनाकर मार्केटिंग की जा रही है, उस पर जनता को असली बात पता होनी चाहिये... एक तो सबसे पहले कांग्रेस जिस दावे को परोस रही है, उसकी हकीकत नियम व शर्त कुछ और है, जो किसानों को सीधे लाभ नहीं पहुंचाती... दूसरा एक सबसे बड़ा सत्य है कि कांग्रेस के लिए किसान सिर्फ वोट बैंक हैं और हमारे लिए किसान अन्नदाता हैं.. यही भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस में सबसे बड़ा अंतर है..

आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र भाई मोदी जी की सरकार ने पांच साल से कम समय में 1 करोड़ 25 लाख घर बनाकर लोगों को दे दिया है. पहले की योजनाएं जो नामों के आधार पर चली वो आज जमीन पर दिखाई नहीं पड़ती हैं, हमारी सरकार नाम के झगड़ों में न पड़कर काम करने पर विश्वास करती है. आदरणीय मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने कोई नरेंद्र मोदी आवास योजना नहीं बनाई, न ही नमो आवास योजना बनाई और न ही कोई किसी राज्य के मुख्यमंत्री के नाम से बनाई, बल्कि प्रधानमंत्री आवास योजना शुरू की, ताकि अगला प्रधानमंत्री भी इस आवास योजना को आगे जारी रख सके...

कांग्रेस की सरकारों ने समय रहते किसान के हितों से जुड़ी परियोजनाओं को पूरा कर दिया होता, तो आज किसानों को कर्ज लेने की जरूरत नहीं पड़ती... पहले कांग्रेस की सरकारों ने किसानों को कर्ज लेने पर मजबूर किया और आज कांग्रेस कर्जमाफी के नाम पर किसानों को गुमराह कर रही है... देश के उज्ज्वल भविष्य के लिए देश के किसानों को ताकतवर बनाने की दिशा में माननीय प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में आज हम आगे बढ़ रहे हैं... हम किसानों और देश की सेवा को अपना धर्म मानकर कार्य कर रहे हैं. बीच से बाजार तक नई व्यवस्था खड़ी करके हम किसान को सशक्त कर रहे हैं... मैं फिर अपना वही वक्तव्य दोहराना चाहूंगा यह पब्लिक है, सब जानती है...

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आदरणीय प्रधानमंत्री जी के फैसले का स्वागत

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किसानों पर कांग्रेस का छलावा अब उजागर

आज सुबह सुबह मध्य प्रदेश की एक ऐसी खबर पर नजर गई जो कांग्रेस एवं तमाम विपक्षी दलों के झूठ और किसानों को दिए झाँसे की पोल खोल कर रख देती है... झूठ के बल पर जहां कांग्रेस ने हाल में कुछ राज्यों में सरकारें बना ली, वहीं जब सच में किसानों का कर्ज माफी की बात सामने आ रही है तो नतीजा गोलमाल और हेराफेरी सा प्रतीत हो रहा है... मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले में किसान ऋण माफी की प्रक्रिया शुरू होते ही 76 कृषि साख सहकारी समितियों में हुए घोटाले की परतें खुलने लगी हैं। समितियों की ओर से पंचायत पर ऋणदाताओं की सूची चस्पा की तो ऐसे किसान सामने आए, जिन्होंने ऋण लिया ही नहीं, लेकिन वह कर्जदार हैं। किसानों ने जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की शाखा व समितियों पर पहुंच कर आपित्त दर्ज कराई है। किसानों का कहना है कि जब बैंक से कर्ज लिया ही नहीं तो माफी कैसी? जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की ओर से किसानों को फसल के लिए ऋण साख सहकारी समितियों के माध्यम से दिया जाता है। पिछले दस साल में बिना कागजी कार्रवाई किए 120 करोड़ का फर्जी ऋण वितरण किया गया। वर्ष 2010 में ऋण वितरण घोटाला सामने आया था, लेकिन तत्कालीन भाजपा...

प्रियंका गांधी क्या रावर्ट वाड्रा के लिये आई हैं ?

जिस दिन प्रियंका गांधी को कांग्रेस का औपचारिक रूप से महासचिव बनाया गया था , मुझे लगा था कि कांग्रेस में प्राण फूंकने और राहुल गांधी की एकरसता और मूर्खता से निपटने के लिए प्रियंका को लाया गया है । और कि ठीक ही लाया गया है । प्रियंका में संभावना भी बहुत देखी गई । लेकिन आज पता चला कि वह सारी कवायद तो राबर्ट वाड्रा के भ्रष्टाचार पर राजनीतिक पर्दा डालने की थी , रावर्ट वाड्रा को उबारने के लिए थी , कांग्रेस को उबारने की नहीं । दिल्ली में आज सुबह लगे राहुल , प्रियंका और रावर्ट वाड्रा के लगे पोस्टर भी यही चुगली खाते हैं , जो बाद में उतार दिए गए । लेकिन कांग्रेस इस में सफल होती फिलहाल तो नहीं दिख रही । आज शाम ई डी आफिस में राबर्ट वाड्रा को छोड़ कर फटाक से कांग्रेस महासचिव की कुर्सी पर जा कर बैठ जाना , फिर भाग कर ई डी आफिस रावर्ट वाड्रा को लेने आ जाना , बहुत ही बचकाना राजनीतिक कदम था प्रियंका का। अभी रावर्ट वाड्रा को ई डी के कई चक्कर लगाने हैं , तो प्रियंका राजनीति कब करेंगी , रावर्ट वाड्रा को अटेंड कब करेंगी। प्रियंका ने अपनी बाक़ायदा राजनीति का आज का पहला दिन बहुत ख़राब परफार्म किया । भ्रष्ट ही...