देश के यशस्वी प्रधानमंत्री आ. नरेंद्र मोदी जी ने एक नारा दिया था, सबका साथ, सबका विकास... देशवासियों को इसका पर्याय एक के बाद समझ में आ गया होगा। 07 जनवरी 2019 को हिन्दुस्तान के संवैधानिक इतिहास में एक ऐसा मोड़ आया, जब आरक्षण के चल रहे मापदंडों को बिना छेड़े, सवर्णों को भी 10 फीसदी आरक्षण देने की घोषणा मा. प्रधानमंत्री ने कर दी। मेरा मानना है कि इससे ज्यादा ‘अच्छे दिन’ का उदाहरण देने की आवश्यकता नहीं है। माननीय प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में एक के बाद एक सकारात्मक कदम इस बात का सुबूत है कि हम विकास की ओर दिन प्रतिदिन अग्रसर हो रहे हैं और इस विकास की रफ्तार को बनाए रखना हम सबकी जिम्मेदारी है।
चलिए, आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों जातियों को अब 10 फीसदी आरक्षण दिया जाएगा। सबसे अहम कि इसके लिए संविधान संशोधन बिल संसद में पेश हो सकता है। लंबे अरसे बाद ऐसा होगा कि संविधान में संशोधन कर देशहित में बड़े फैसले केंद्र सरकार ले रही है।
मैंने बार-बार कहा कि हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री कोई भी निर्णय चुनाव का चेहरा देखकर नहीं लेते। उनकी विचारधारा प्रगतिशीलता का परिचायक है। लेकिन मुझे इस विषय पर भी कांग्रेस का नकारात्मक स्वरूप होना दुखी करता है। कांग्रेस के एक नेता कहते नज़र आए कि ‘इस प्रकार के आरक्षण पर काफी तकनीकि दिक्कतें हैं, लोकसभा चुनाव से पहले इस प्रकार आरक्षण देने का क्या मकसद है, ये भी देखना होगा।‘ मेरा यही कहना है कि साहेब, आपलोग 60 वर्षों से अधिक तक शासन किए, देश का प्रतिनिधित्व... अब अगर कोई देश को आगे लेकर जा रहा है तो आइए मिलकर देश की तरक्की का सोचें, क्यों आप जनता को गुमराह कर रहे हैं ? आइए, अच्छी पहल, अच्छे कदम, अच्छे निर्णय को अच्छा कहें...
चलिए, आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों जातियों को अब 10 फीसदी आरक्षण दिया जाएगा। सबसे अहम कि इसके लिए संविधान संशोधन बिल संसद में पेश हो सकता है। लंबे अरसे बाद ऐसा होगा कि संविधान में संशोधन कर देशहित में बड़े फैसले केंद्र सरकार ले रही है।
मैंने बार-बार कहा कि हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री कोई भी निर्णय चुनाव का चेहरा देखकर नहीं लेते। उनकी विचारधारा प्रगतिशीलता का परिचायक है। लेकिन मुझे इस विषय पर भी कांग्रेस का नकारात्मक स्वरूप होना दुखी करता है। कांग्रेस के एक नेता कहते नज़र आए कि ‘इस प्रकार के आरक्षण पर काफी तकनीकि दिक्कतें हैं, लोकसभा चुनाव से पहले इस प्रकार आरक्षण देने का क्या मकसद है, ये भी देखना होगा।‘ मेरा यही कहना है कि साहेब, आपलोग 60 वर्षों से अधिक तक शासन किए, देश का प्रतिनिधित्व... अब अगर कोई देश को आगे लेकर जा रहा है तो आइए मिलकर देश की तरक्की का सोचें, क्यों आप जनता को गुमराह कर रहे हैं ? आइए, अच्छी पहल, अच्छे कदम, अच्छे निर्णय को अच्छा कहें...

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