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गठबंधन नहीं, "ठगबंधन"

आज हर समाचार पत्र में  सपा- बसपा के गठबंधन की खबर है... मेरा मानना है यह गठबंधन नहीं ''ठगबंधन'' है...  लेकिन इन सबके बीच  यही कहना चाहता हूँ कि वर्ष 2019 का चुनावी युद्ध सदियों तक असर छोड़ने वाला है और ये चुनाव वैचारिक युद्ध का चुनाव है। दो विचारधाराएं आमने-सामने खड़ी हैं। आगामी चुनाव भारत के गरीब के लिए बहुत मायने रखता है। स्टार्टअप को लेकर निकले युवाओं के लिए ये चुनाव मायने रखता है। करोड़ों भारतीयों, जो दुनिया में भारत का गौरव देखना चाहते हैं, के लिए ये चुनाव मायने रखता है।
एक-दूसरे का मुंह न देखने वाले आज हार के डर से एक साथ आ गए हैं, वो जानते हैं कि अकेले नरेंद्र मोदी जी को हराना मुमकिन नहीं है। 2014 के चुनाव में हम इन दलों को पराजित कर चुके हैं और आगे भी इन्हें पराजित करेंगे। भाजपा गरीबों के कल्याण और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को आगे बढ़ा रही है, जबकि विपक्षी दल केवल सत्ता के लिए साथ आ रहे हैं। 5 साल के अंदर भाजपा का गौरव ‘दिन दुनी’ गति से बढ़ा है।

भाजपा का नयी दिल्ली में चल रहे अधिवेशन पर मेरा कहना है कि ये भारतीय जनता पार्टी के देशभर में फैले कार्यकर्ताओं के लिए संकल्प करने का अधिवेशन है। भाजपा कार्यकर्ता अजेय योद्धा ‘मोदी के नेतृत्व में’ चुनाव में जा रहे हैं।

राम मंदिर मामले पर मेरा मानना  है कि भाजपा भी चाहती है जल्द से जल्द उसी स्थान पर भव्य राम मंदिर का निर्माण हो और इसमें कोई दुविधा नहीं है। इसपर हमारे पार्टी अध्यक्ष आ. अमित शाह जी भी कह चुके हैं कि वो प्रयास कर रहे हैं कि सुप्रीम कोर्ट में चल रहे केस की जल्द से जल्द सुनवाई हो, लेकिन कांग्रेस इसमें भी रोड़े अटकाने का काम कर रही है। कांग्रेस अपना रुख स्पष्ट करे। उन्होंने कहा कि भाजपा कार्यकर्ता आश्वस्त रहें कि संविधान के तहत राम मंदिर के निर्माण के लिए पार्टी कटिबद्ध है। मेरा मानना है कि एक जमाना था जब देश में ‘कांग्रेस बनाम अन्य’ हुआ करता था, आज ‘मोदी बनाम अन्य’ हो गया है।

जिस भारत की कल्पना विवेकानंद जी ने की थी उस भारत को हम मा. प्रधानमंत्री आ. श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में बनाने का पूरा प्रयास कर रहे हैं।

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