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जनता को कर्नाटक में कांग्रेस का नाटक समझ में आने लगा है


आज सुबह-सुबह कर्नाटक में सियासी घमासान की खबरों को न्यूज़ चैनलों के माध्यम से देखा... शुरू से कांग्रेस जोड़-तोड़ की राजनीति में विश्वास करती है... एक तो कांग्रेस भाजपा के विधायकों को तोड़ने की जुगत में है... लगातार रणनीतियां तैयार कर रही है... तो वहीं दूसरी ओर उल्टे वह भाजपा पर ऐसे अनर्गल आरोप लगाती रही है... भाजपा के सभी 104 विधायक अभी भी एकजुट हैं, लेकिन कांग्रेस को अपने गिरेबां में देखना चाहिए कि आपकी ऐसी क्या कमी रही कि  आपसे आपके विधायक भी नहीं संभाले जा रहे हैं... अच्छा तो यह होता कि जब आप अपनी नीतियों को खुद झांकते... आपसे पार्टी तो संभल नहीं रही, उल्टे भाजपा पर अपनी असफलता का ठीकरा फोड़ना चाह रहे हैं...

हकीकत पर गौर करेंगे तो पाएंगे कि कर्नाटक में जेडीएस-कांग्रेस ने सरकार बनाने के लिए खरीद फरोख्त की शुरुआत की... एक दो दिनों तक दिल्ली में रुक कर कुमारस्वामी जी ने विधायकों के से संपर्क साधने की कोशिश की... हालांकि भाजपा पर इसका असर इसलिए नहीं होगा, क्योंकि भाजपा विचार और सिद्धांतों पर आधारित पार्टी है... कांग्रेस की तरह केवल कुर्सी को लेकर हमारे यहां राजनीति नहीं होती...

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