हाल में पिछले 1 हफ्ते के अंदर देश की राजनीति ने जिस तरह करवट ली है, उससे यह समझ में आने लगा है कि जब भी कोई विकास पुरुष इस देश को विकासशील बनाने की पहल करेगा, तमाम सत्ता-लोभी शक्तियां, उसे नीचा दिखाने के लिए हरसंभव लगी रहेंगी... सवाल सिद्धांतों का है जो तमाम विपक्षी दल खोते जा रहे हैं...
उत्तर प्रदेश में जिसने कई वर्षों तक शासन किया, वह आज यह कह रहे हैं कि हमारे बर्थडे पर आप हमें अगले चुनाव में जीत का तोहफा दीजिए... सवाल है कि क्या आपको अपने कर्म पर भरोसा नहीं रहा... जनता ने जब आपको मौका दिया था, आप उस मुताबिक कर्म करते... विश्वास जीतते... आज आपको है खैरात में और गिफ्ट में जीत मांगने की जरूरत नहीं पड़ती...
आज तमाम विपक्षी दल देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को हराने के लिए किसी भी स्थिति में जाने को तैयार हैं... वह किसी से भी हाथ मिलाने को तैयार हैं... लेकिन जनता सब समझती है... यह वही लोग हैं, जो जनता के सामने समय-समय पर अलग-अलग मुखौटा पहन के जाते रहते हैं... जनता को उल्लू बनाकर सीटें जीते हैं और फिर बंद कमरे में सरकार बनाने का फार्मूला सेट करते हैं...
फिर से मेरा वही स्लोगन होगा, यह पब्लिक है सब जानती है... और इस बार का चुनाव वैचारिक और सिद्धांतों पर आधारित चुनाव होगा और इस इसमें देश की जनता को स्पष्ट तरीके से बता देना होगा कि हम जाति और धर्म पर आधारित नहीं, बल्कि विकास पर आधारित सरकार को चुनेंगे...

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