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व्यापारियों में खुशी की लहर

मैं हाल में कई व्यापारियों से मिला... मुझे अपना अनुभव बताते हुए बहुत अच्छा महसूस हो रहा है कि मा. प्रधानमंत्री जी के निर्देशानुसार, GST Council ने GST से छूट की सीमा को जो दोगुना कर 40 लाख रुपये कर दिया है, उससे व्यापारियों में खुशी की लहर है। इस फैसले से अब 1.5 रुपये तक का कारोबार करने वाली इकाइयां 1% की दर से GST भुगतान की कम्पोजिशन योजना का लाभ उठा सकेंगी। पहले 1 करोड़ रुपये तक के कारोबार पर यह सुविधा प्राप्त थी। उद्योग मंडल CII के अनुसार, जीएसटी काउंसिल की इस पहल से पंजीकृत 1.17 करोड़ कारोबारियों में से करीब 70 प्रतिशत का फायदा होगा। माननीय प्रधानमंत्री जी के निर्देश पर लघु या मध्यम उद्योग लगाने की सोच रहे लोगों को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने पीएसबी लोन इन 59 मिनट की शुरूआत की। आवेदक को बैंक के चक्कर न लगाने पड़ें और महज ऑनलाइन आवेदन के 59 मिनट में लोन होने की सुविधा दी गई। व्यापार बढ़ाने की इच्छा रखने वाले लघु एवं मध्यम उद्यमियों को दिया जाता है।
मैं इस ब्लॉग से माध्यम से देश को यह बताना चाहता हूं कि माननीय प्रधानमंत्री जी ने ऐसे-ऐसे निर्णय देश हित में लिए हैं, जो अभूतपूर्व और ऐतिहासिक रहा है। ज़रूरत इस बात की भी है कि हम खुद सजग हों, जागरूक बनें और अपने आसपास भी जागरूक करें... केंद्र सरकार की योजनाओं को समझें, क्योंकि हम जब तक खुद नहीं समझेंगे, हमें गलत पर गलत समझाया जाता रहेगा... आइए देश के विकास में अपना सहयोग दें... 

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आज सुबह सुबह मध्य प्रदेश की एक ऐसी खबर पर नजर गई जो कांग्रेस एवं तमाम विपक्षी दलों के झूठ और किसानों को दिए झाँसे की पोल खोल कर रख देती है... झूठ के बल पर जहां कांग्रेस ने हाल में कुछ राज्यों में सरकारें बना ली, वहीं जब सच में किसानों का कर्ज माफी की बात सामने आ रही है तो नतीजा गोलमाल और हेराफेरी सा प्रतीत हो रहा है... मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले में किसान ऋण माफी की प्रक्रिया शुरू होते ही 76 कृषि साख सहकारी समितियों में हुए घोटाले की परतें खुलने लगी हैं। समितियों की ओर से पंचायत पर ऋणदाताओं की सूची चस्पा की तो ऐसे किसान सामने आए, जिन्होंने ऋण लिया ही नहीं, लेकिन वह कर्जदार हैं। किसानों ने जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की शाखा व समितियों पर पहुंच कर आपित्त दर्ज कराई है। किसानों का कहना है कि जब बैंक से कर्ज लिया ही नहीं तो माफी कैसी? जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की ओर से किसानों को फसल के लिए ऋण साख सहकारी समितियों के माध्यम से दिया जाता है। पिछले दस साल में बिना कागजी कार्रवाई किए 120 करोड़ का फर्जी ऋण वितरण किया गया। वर्ष 2010 में ऋण वितरण घोटाला सामने आया था, लेकिन तत्कालीन भाजपा...

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