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हम विकास की राजनीति करते हैं, जबकि विपक्ष विनाश की...


विपक्ष अक्सर भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व की सरकार पर सवाल खड़ा करते हैं कि विजय माल्या भाग गया, नीरव मोदी देश छोड़कर भाग गए... मेरा पूछना है कि कांग्रेस के राज में ऐसे लोग क्यों नहीं भागे? भगोड़े इसलिए भागे क्योंकि उनकी कांग्रेस से सांठगांठ थी और हमारे साथ नहीं... अपनी पार्टी का सच्चा सिपाही होने के नाते मैं अपने क्षेत्र की जनता को ये भरोसा दिलाता हूं कि इन आरोपियों को देश वापस आना ही पड़ेगा... हमारी सरकार ने ही देश-विदेश में विजय माल्या की 6 हजार करोड़ की संपत्त‍ि समेत नीरव मोदी की संपत्त‍ि जब्त करवाई... 15 हजार करोड़ की प्रॉपर्टी को जब्त करवाई... इतना तो तेलांगना जैसे छोटे राज्यों का बजट होता है...

हमारी सरकार ने पहली बार स्वच्छता को प्राथमिकता देते हुए शौचालय बनवाए, रसोई से धुएं को निजात दिलाने के लिए सिलेंडर बांटे, घर-घर बिजली पहुंचाने का काम किया, वन रैंक वन पेंशन का नियम लेकर आए... हम कह सकते हैं कि भारतीय जनता पार्टी ने 22 करोड़ परिवार को कुछ न कुछ दिया है... वहीं कांग्रेस का कृत्य देखिए कि सरकार को सहयोग की बजाय कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने देश को इतना बड़ा झूठ कहा कि राफेल विमान अनिल अंबानी बनाने वाले हैं... खैर, सुप्रीम कोर्ट राफेल मामले की सुनवाई कर रही है... अगर कांग्रेस के पास सबूत हैं तो वे कोर्ट में उसे देकर कोर्ट की मदद कर सकते हैं, लेकिन वे ऐसा नहीं कर रहे हैं...

वर्तमान में भारत-पाकिस्तान के बीच करतारपुर साहेब को लेकर खूब चर्चा हो रही है... यहां के कॉरिडोर ऑफ़ पीस के रूप रखने के मामले पर मेरा मानना है कि यदि पाकिस्तान में आर्मी और सरकार साथ है तो कभी शांति हो ही नहीं सकती... पाकिस्तान शांति चाहता है तो उसे आतंकवाद को बढ़ावा देना बंद करना होगा... यदि ऐसा होता है तो अपने आप शांति होगी...

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आज सुबह सुबह मध्य प्रदेश की एक ऐसी खबर पर नजर गई जो कांग्रेस एवं तमाम विपक्षी दलों के झूठ और किसानों को दिए झाँसे की पोल खोल कर रख देती है... झूठ के बल पर जहां कांग्रेस ने हाल में कुछ राज्यों में सरकारें बना ली, वहीं जब सच में किसानों का कर्ज माफी की बात सामने आ रही है तो नतीजा गोलमाल और हेराफेरी सा प्रतीत हो रहा है... मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले में किसान ऋण माफी की प्रक्रिया शुरू होते ही 76 कृषि साख सहकारी समितियों में हुए घोटाले की परतें खुलने लगी हैं। समितियों की ओर से पंचायत पर ऋणदाताओं की सूची चस्पा की तो ऐसे किसान सामने आए, जिन्होंने ऋण लिया ही नहीं, लेकिन वह कर्जदार हैं। किसानों ने जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की शाखा व समितियों पर पहुंच कर आपित्त दर्ज कराई है। किसानों का कहना है कि जब बैंक से कर्ज लिया ही नहीं तो माफी कैसी? जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की ओर से किसानों को फसल के लिए ऋण साख सहकारी समितियों के माध्यम से दिया जाता है। पिछले दस साल में बिना कागजी कार्रवाई किए 120 करोड़ का फर्जी ऋण वितरण किया गया। वर्ष 2010 में ऋण वितरण घोटाला सामने आया था, लेकिन तत्कालीन भाजपा...

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