Skip to main content

राजनीति क्या-क्या रंग सिखाती है


राजनीति क्या-क्या रंग सिखाती है... ज़रूरत पड़े तो वोट के लिए जाति धर्म भी बदल लेते हैं लोग... कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी जी की जाति और गोत्र एक बार मीडिया में फिर चर्चा में है... यह बताने की ज़रूरत नहीं है कि कांग्रेस किस तरह की नीति वाली पार्टी है... एक खास धर्म और संप्रदाय के मन में नफरत के बीज बोकर कांग्रेस 60 वर्षों से अधिक समय पर सत्ता पर काबिज रही... लेकिन पुष्कर के ब्रह्मा मंदिर में राहुल गांधी ने खुद को कौल ब्राह्मण और दत्तात्रेय गोत्र का बताते हुए पूजा की... इससे पहले भी राहुल गांधी खुद को जनेऊधारी ब्राह्मण और शिवभक्त घोषित कर चुके हैं...

ये मैं नहीं पूरी दुनिया को पता है कि स्व. राजीव जी ने ईसाई सोनिया से शादी की और उनके बेटे राहुल गांधी और बेटी प्रियंका गांधी हैं... जवाहर लाल नेहरू की इकलौती बेटी और भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने पारसी फिरोज गांधी से शादी की... फिरोज जहांगीर का जन्म तत्कालीन बंबई के एक पारसी परिवार में हुआ था... मुंबई के कई पारसियों की तरह यह परिवार भी गुजरात से यहां आया था... पेशे से मरीन इंजीनियर उनके पिता जहांगीर फरदून भरुच से ताल्लुक रखते थे जबकि उनकी मां रतिमाई सूरत से थीं... फिरोज और इंदिरा की शादी से नेहरू खुश नहीं थे... दोनों ने महात्मा गांधी के हस्तक्षेप के बाद शादी इलाहाबाद में की थी जिसके बाद फिरोज को महात्मा गांधी ने अपना सरनेम भी दिया... अगर कोई पारसी पुरुष गैर-पारसी महिला से विवाह करता है तो उसे पारसी समुदाय स्वीकार नहीं करता है हालांकि उनके बच्चों को पारसी धर्म में आने की इजाजत होती है... पारसी बच्चे अधिकतर अपने पिता के ही धर्म को ही अपनाते हैं... पारसी पिता और हिंदू मां की संतान राजीव गांधी ने कैथोलिक सोनिया गांधी जी से शादी की... भारत की चुनावी राजनीति में जाति और धर्म के नाम पर गोलबंदी का अपना एक समृद्ध इतिहास रहा है... ऐसे में राहुल गांधी जी भी चुनावी बैतरनी को पार करने की चाह में कोई भी कसर नहीं छोड़ना चाहते ... सो झूठ पर झूठ जारी है...

Comments

Popular posts from this blog

किसानों पर कांग्रेस का छलावा अब उजागर

आज सुबह सुबह मध्य प्रदेश की एक ऐसी खबर पर नजर गई जो कांग्रेस एवं तमाम विपक्षी दलों के झूठ और किसानों को दिए झाँसे की पोल खोल कर रख देती है... झूठ के बल पर जहां कांग्रेस ने हाल में कुछ राज्यों में सरकारें बना ली, वहीं जब सच में किसानों का कर्ज माफी की बात सामने आ रही है तो नतीजा गोलमाल और हेराफेरी सा प्रतीत हो रहा है... मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले में किसान ऋण माफी की प्रक्रिया शुरू होते ही 76 कृषि साख सहकारी समितियों में हुए घोटाले की परतें खुलने लगी हैं। समितियों की ओर से पंचायत पर ऋणदाताओं की सूची चस्पा की तो ऐसे किसान सामने आए, जिन्होंने ऋण लिया ही नहीं, लेकिन वह कर्जदार हैं। किसानों ने जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की शाखा व समितियों पर पहुंच कर आपित्त दर्ज कराई है। किसानों का कहना है कि जब बैंक से कर्ज लिया ही नहीं तो माफी कैसी? जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की ओर से किसानों को फसल के लिए ऋण साख सहकारी समितियों के माध्यम से दिया जाता है। पिछले दस साल में बिना कागजी कार्रवाई किए 120 करोड़ का फर्जी ऋण वितरण किया गया। वर्ष 2010 में ऋण वितरण घोटाला सामने आया था, लेकिन तत्कालीन भाजपा...

राहुल जी, अब आपको देश के सामने सिर झुकाकर माफी मांगनी चाहिए

आज CAG की बहुप्रतीक्षित रिपोर्ट संसद में पेश कर दी गयी जिसमें कीमत का खुलासा किये बिना कहा गया है कि यह सौदा पूर्ववर्ती संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के समय किए गए सौदे से कुल मिलाकर 2.86 फीसदी सस्ता है। तो क्या ये मान लिया जाए कि कांग्रेस के अध्यक्ष श्रीमान राहुल गांधी जी का गैर-जिम्मेदाराना रवैये ने राजनीतिक फायदे और वोट-बैंक के लिए देश को एक ऐसे भ्रम में रखा, जिसने देश की साख को धूमिल करने का कार्य किया है। लेकिन मैं राहुल जी को यही कहना चाहता हूं कि अगर आपको सीएजी की रिपोर्ट को भी अब झूठा समझना है तो समझिए, लेकिन अब आपको अपनी हरकतों के एवज में देश के सामने सिर झुकाकर माफी मांगनी चाहिए। मैं मानता हूं कि शब्द ब्रह्म है। वो तीर है जो निकलने के बाद कभी वापस नहीं आते। यहां तो राहुल जी के कृत्य से पूरे हिन्दुस्तानवासियों को फ्रांस ही नहीं बल्कि विश्वभर में रह रहे हिन्दुस्तानियों को वहां की सरज़मीं पर सिर को शर्म से झुकाना पड़ा होगा। राहुल जी, अब तो आपके माफी मांगने से वो पल भी नहीं लौटेगा।  राहुल जी, लेकिन इसमें गलती आपकी नहीं है, आपके सिपहसालारों की है, जो समय-समय पर अपने क...

गठबंधन नहीं, "ठगबंधन"

आज हर समाचार पत्र में  सपा- बसपा के गठबंधन की खबर है... मेरा मानना है यह गठबंधन नहीं ''ठगबंधन'' है...  लेकिन इन सबके बीच  यही कहना चाहता हूँ कि वर्ष 2019 का चुनावी युद्ध सदियों तक असर छोड़ने वाला है और ये चुनाव वैचारिक युद्ध का चुनाव है। दो विचारधाराएं आमने-सामने खड़ी हैं। आगामी चुनाव भारत के गरीब के लिए बहुत मायने रखता है। स्टार्टअप को लेकर निकले युवाओं के लिए ये चुनाव मायने रखता है। करोड़ों भारतीयों, जो दुनिया में भारत का गौरव देखना चाहते हैं, के लिए ये चुनाव मायने रखता है। एक-दूसरे का मुंह न देखने वाले आज हार के डर से एक साथ आ गए हैं, वो जानते हैं कि अकेले नरेंद्र मोदी जी को हराना मुमकिन नहीं है। 2014 के चुनाव में हम इन दलों को पराजित कर चुके हैं और आगे भी इन्हें पराजित करेंगे। भाजपा गरीबों के कल्याण और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को आगे बढ़ा रही है, जबकि विपक्षी दल केवल सत्ता के लिए साथ आ रहे हैं। 5 साल के अंदर भाजपा का गौरव ‘दिन दुनी’ गति से बढ़ा है। भाजपा का नयी दिल्ली में चल रहे अधिवेशन पर मेरा कहना है कि ये भारतीय जनता पार्टी के देशभर में फैले कार्यकर्ताओं के लि...