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तलाक ड्रामा और पूर्ववर्ती बिहार


मैं बहुत दिनों से बिहार के एक राजनीतिक परिवार की मंशा  और सोच पर कहना चाहता था,  लेकिन अक्सर में उनका निजी मामला बताकर इस पर कुछ कहने से परहेज कर रहा था... लेकिन अब मुझे लगता है कि इस विषय पर अपना पक्ष मुझे रखना चाहिए... हाल के दिनों में एक राजनीतिक परिवार के यहां जिस तरह का तलाक-ड्रामा मचा हुआ है, वह यह सोचने के लिए मजबूर करता है कि जिस एक परिवार की पार्टी ने बिहार में पूर्व में 15 वर्षों तक शासन किया, उनके आज किस तरह के कृत्य समाज के सामने आ रहे हैं... इस बात से मैं पूर्णतया सहमत हूं और मेरा निजी मानना है कि एक सरकार का जनता अनुसरण करती है, उनके निर्णय का स्वागत करती है हर कदम का अनुपालन करती है... लेकिन सरकार को चलाने वाले शासन के लोग ही अगर सुसंस्कृत नहीं होंगे, तो वह जनता के बीच क्या संवाद स्थापित करेंगे... यह सोच इसलिए अचानक आन पड़ी है, क्योंकि बिहार में हाल में उस परिवार के बारे में जिस तरह की खबरें मीडिया में आ रही हैं, वह किसी भी स्तर पर सही नहीं कही जा सकती और इसके साथ-साथ यह संदेह भी पैदा करता है इन्होंने पूर्व में अपने शासन में किस तरह के कृत्य से समाज को नकारात्मक संदेश देने की कोशिश की होगी...

जो खुद अनुशासित नहीं है, वह समाज या राज्य को शासन का पाठ क्या पढ़ाएंगे... उस परिवार के लोग आज अगर मीडिया के सामने अपनी उपलब्धियां बताते हैं, या खुद को मुख्यमंत्री का उम्मीदवार बताते हैं, तो वह कैसे उम्मीदवार होंगे और कैसी सोच वाले होंगे इसका अंदाजा बिहार की जनता को लग चुका है...

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