आज सुबह-सुबह उठते ही मीडिया में समाचार पर नजर गई तो आश्चर्य में रह गया... खबर थी कि आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने कोलकाता में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात कर कहा कि लोकतंत्र खतरे में है... कितना दुखद है, यूपीए सरकार ने 60 वर्षों से अधिक तक देश पर राज किया... शुरू को देश को बांटने के साथ समाज को बांटने तक की नीति खेली... घोटाले पर घोटाले किए... हमारा देश विश्व में भ्रष्ट देशों की सूची शामिल होने लगा, तब लोकतंत्र खतरे में नहीं था, लेकिन एक चाय वाला देश का प्रधानमंत्री बन गया और वह ना खाऊंगा, न खाने दूंगा की नीति पर काम कर रहा है तो लोकतंत्र खतरे में दिखने लगा ? असल में ये वही लोग हैं, जो वर्षों से केवल कुर्सी की राजनीति करते रहे हैं...
हैरत देखिए कि तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी जी के साथ टीडीपी प्रमुख ने कहा कि देश में अल्पसंख्यकों के प्रति असहिष्णुता है और सीबीआई, ईडी, आयकर विभाग, आरबीआई और सीएजी जैसे संस्थानों का जिक्र किया... उन्हें नहीं पता कि अल्पसंख्यकों के नाम पर आज तक इन लोगों ने समाज को दिग्भ्रमित करने का काम किया... मुस्लिम महिलाओं के लिए हमारी सरकार ने जिस तरह उनके पक्ष में आकर बिना वोट बैंक की परवाह किए तीन तलाक पर फैसला लेने का काम किया, क्या वो ऐतिहासिक नहीं है ? दूसरा, जहां तक बात सीबीआई, ईडी, आयकर विभाग जैसे मामलों की रही तो इन्हें पता होना चाहिए कि सरकार किसी व्यक्ति विशेष की नहीं होती, बल्कि एक पूरा तंत्र होता है और यही मोदी सरकार की खासियत है कि सबको बोलने और बात रखने की आजादी है, इसी बीच से रास्ता और समाधान निकलता है, यह अपने आप में एक सिस्टम का हिस्सा है... यूपीए सरकार में तो किसी को बोलने की आजादी भी नहीं था... तो लोकतंत्र कब खतरे में था, तब या अब ? विचार कीजिए नायडू साहब...

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