मैं जब मौजूदा राजनीतिक हालात पर गौर करता हूं तो बहुत दुखी होता हूं। कुछ ऐसी भावनाओं को आप सबों से इस ब्लॉग के माध्यम से शेयर कर रहा हूं। आप देखिए, हाल में सपा और बसपा के गठबंधन को लेकर मीडिया में क्या चर्चा हो रही है। कहा जा रहा है कि लोकसभा चुनाव 2019 को लेकर बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी के बीच गठबंधन 11 दिसंबर को आनेवाले पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव नतीजे की घोषणा के बाद किया जा सकता है। पूरे मामले से वाकिफ बीएसपी सूत्र ने ही इस बात की जानकारी दी है।
बीएसपी सूत्र ने बताया- सीटों के बंटवारे पर एसपी और बीएसपी के बीच बात चल रही है। उन्होंने आगे बताया कि पांच चुनाव राज्य- छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान, मिजोरम और तेलंगाना में परिणाम आने के बाद गठबंधन अपने स्वरूप ले सकता है। बीएसपी सूत्र ने बताया पार्टी के जिला ईकाई के नेताओं को यह निर्देश दिया गया था कि वह अपने कार्यकर्ताओं को बताए कि गठबंधन का यह फैसला इसलिए लिया गया है ताकि पार्टी अपने खाए राजनीतिक जनाधार को वापस हासिल कर सके और बीजेपी को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा सके। इतनी बातें मीडिया में प्रमुखता से बताई जा रही है। सवाल है कि क्या जनता को राजनीति में सचमुच बेवकूफ समझा जाता है कि पहले आप बेतुकी बातें कर चुनाव लड़िए, फिर किसी और के साथ गठबंधन करके फिर सुर-अलाप परिवर्तन कर किसी और के साथ हो लीजिए... कितना दुखद है।
राजनीति एक सकारात्मक शब्द है। किसी समाज, प्रदेश या देश को चलाने की एक नीति होती है, लेकिन मौजूदा राजनीतिक पुरोधाओं को जनता से लगातार मिले जवाब के बाद भी वो अपनी जोड़तोड़ की हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं। जनता को सावधान रहना होगा।

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