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सिख विरोधी दंगे पर 25 वर्षों तक कांग्रेस ने देश को गुमराह किया

सिख विरोधी दंगे पर माननीय अदालत का जो फैसला आया आया है, उस फैसले ने उन सैकड़ों दंगा पीड़ितों की आत्मा पर मरहम लगाने का काम किया है... कांग्रेस ने दंगे के बाद 25 वर्षों तक शासन किया, लेकिन कभी भी इतनी बड़ी ह्रदय विदारक घटना के पीड़ितों को न्याय कैसे मिले इस पर चिंता नहीं की.. मेरा मानना है कि चुँकि सिख विरोधी दंगों में कांग्रेस के नेता शामिल थे, इसलिए कांग्रेस ने पिछले 25 सालों में इनको बचाने का भरपूर  प्रयास किया।

कांग्रेस ने लगभग 25 साल सत्ता में रहने के दौरान सिखों को न्याय दिलाने के लिए कोई भी प्रयास नहीं किया। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने कहा था कि जब कोई बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है। ये बयान ज़ख्मों पर नमक लगाने वाला था। कांग्रेस पार्टी ने राजीव गांधी के बयान से खुद को अलग नहीं किया। पूर्व प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंह ने बहुत दबाव के बाद माफ़ी मांगी थी।
सिख बंधुओं को न्याय दिलाने के क्रम में पहला बड़ा काम अटल बिहारी वाजपेयी ने नानावटी कमीशन बनाकर किया था। नानावटी कमीशन ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि योजनाबद्ध तरीके से सिक्खों को मारा गया था। कुछ नेता के खिलाफ सबूत भी मिले... लेकिन वर्ष 2004 में बीजेपी सरकार जाने के बाद उस पर कोई काम नहीं हुआ। 2014 में  बीजेपी सरकार बनने के बाद सिख विरोधी दंगों की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया था जिस पर हाल में कोर्ट ने दो लोगों को सजा सुनाई है। वो एसआईटी जांच के कारण सम्भव हो सका है।

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