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स्वच्छ भारत अभियान :महिला सशक्तिकरण के लिये वरदान

भारत सरकार द्वारा प्रारम्भ किया गया, स्वच्छ भारत अभियान महिला सशक्तिकरण के लिये एक वरदान साबित हुआ है। देश भर के स्कूलों, ग्रामीण क्षेत्रों, शहरी क्षेत्रों में भारत सरकार द्वारा प्रारम्भ की गयी शौचालय निर्माण योजना का सबसे अधिक लाभ महिलाओं को मिला है। इस अभियान के संबन्ध में जागरूकता पैदा करने हेतु फिल्म उधोग का भी योगदान सराहनीय रहा है। विगत दिनों प्रदर्शित हिन्दी फिल्म पैडमैन और टाॅयलेट एक प्रेम कथा जैसी फिल्मों ने स्वच्छता और खुले में शौच के प्रति लोगों को जागरूक किया है। यह एक विडम्बना ही है कि भारत में आज भी लगभग 80 प्रतिशत महिलायें सैनेंट्री नैपकिन का प्रयोग नही करती है। शारीरिक स्वच्छता न होने तथा खुले में शौच से महिलाओं के स्वास्थ्य में भी प्रभाव पड़ता है। हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत सरकार द्वारा चलाये गये स्वच्छता मिशन के कारण शिशु मृत्यु दर में कमी आने के साथ-साथ महिलाओं के स्वास्थ्य में भी सुधार हुआ है। वहीं दूसरी और घरों में शौचालयों की सुविधा होने से महिलाआंे के प्रति छेड़-छाड़ व बलात्कार की घटनाआंे में भी कमी परिलक्षित हुई है। आज देश के लगभग 4.5 लाख स्कूलों में शौचालयों का निर्माण होने से स्कूली छात्राओं के लिये अपनी शिक्षा जारी रखना संभव हो पाया है
भारत में सबसे अधिक शोषित वर्ग की श्रेणी में आज भी नारी ही आती है। पुरूष प्रभुत्व समाज में महिलाओं के लिये अनेक बन्दिशें है। ग्रामीण क्षेत्र की महिला इन बन्दिशों से सबसे अधिक प्रभावित होती है। इसमें कोई संदेह नही है कि अभी भी देश की 80 प्रतिशत महिलायें सैनेट्री नेपकिन का प्रयोग नही करती है जिस कारण उनके स्वास्थ्य में विपरीत प्रभाव पड़ता है। शौचालयों के साथ-साथ महिलाओं को सैनेट्री नेपकिन के प्रयोग के लिये प्रोत्साहित करने हेतु महिला समूहों की भागीदार बढ़ानी होगी।
स्वच्छ भारत मिशन में महिलाओं की सहभागिता बेहद महत्त्वपूर्ण है। स्वच्छता मिशन के व्यापक प्रचार-प्रसार से आज पूरे देश में स्वच्छता के प्रति जागरूकात पैदा हो चुकी है। स्वच्छता से स्वास्थ्य, पर्यावरण को होने वाले लाभ व गंदगी के दुष्प्रभाव से आम जनता को अभी और अधिक जागरूक किये जाने की आवश्यकता है। स्वच्छता मिशन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाये जाने से इस अभियान के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।

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