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सावधान- देश का माहौल बिगाड़ने की नापाक कोशिश कर रहा विपक्ष

इस समय देश में किसान आंदोलन के चर्चे हो रहे हैं। ठीक है यह विषय है, लेकिन मेरा अपना मत है इसपर। जब मिल-बैठकर बात हो सकती है तो क्यों नहीं समाधान की ओर ये जा रहे हैं ? जवाब स्पष्ट है, भारतीय किसान यूनियन नीत किसान आंदोलन राजनीति से प्रेरित है। इसके पीछे एक ही कारण है कि सरकार को चुनाव से पहले अस्थिर करना, इसलिए बहुत से लोगों के विभिन्न मकसद हैं। अन्यथा, देश भर के किसान मोदी सरकार से बहुत संतुष्ट और आभारी हैं। मोदी सरकार ने उत्पादन की लागत पर 50 फीसदी लाभ के साथ निश्चित न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा की थी, लेकिन इन किसानों को एमएसपी तय करते समय इस्तेमाल किए गए फार्मूले की चिंता नहीं है। 
मैं देख रहा हूं कि जहां-जहां चुनाव है और विपक्षी वहां सत्ता की लालच में उन भाजपा सरकारों को अस्थिर करने की जुगत में हैं, वहां ऐसे मामले सामने आ रहे हैं। जैसे छत्तीसगढ़ प्रदेश में किसानों का आंदोलन। वहां भी चुनाव करीब है, लिहाजा विपक्षी पार्टियां किसानों को उकसाने की कोशिश कर रही है। किसानों को भ्रमित कर उनके आंदोलन को दिशा परिवर्तन देने करने की कोशिश की जा रही है। दूसरे राजनीतिक दल चुनाव से भयभीत है, यही वजह है कि किसानों के हितैषी बनकर आंदोलन को राजनीतिक रंग देने का प्रयास कर रहे है।
दूसरे राज्यों को देखकर छत्तीसगढ़ में भी वैसे ही हालात निर्मित करने का षड्यंत्र किया जा रहा है। जबकि ऐसी स्थिति निर्मित करने की जरूरत नहीं थी। वहां मा. मुख्यमंत्री जी के साथ बैठकर समाधान निकल सकता है और किसानों के हितों को ध्यान रखकर रास्ता निकाला भी जा रहा है। सरकार उनकी मांगों का मिल-बैठकर समाधान निकालने को तैयार है और आगे भी हर मोर्चे पर किसानों की मदद को प्रतिबद्ध है, लेकिन कोई बातचीत को तैयार ही नहीं... इसका मतलब क्या है, कि उन्हें समाधान चाहिए ही नहीं... जबकि छत्तीसगढ़ के हालात दूसरे राज्यों की तुलना में कहीं बेहतर हैं। किसान संगठनों को आंदोलन जैसे कदम उठाने की जरूरत ही नहीं है। जबकि उसी छ्त्तीसगढ़ में बीजेपी की सरकार बनने के बाद से किसानों की बेहतरी के लिए प्रदेश में ढेरों काम हुए हैं। कांग्रेस की सरकार के दौरान 14 फीसदी ब्याज दर पर किसानों को ऋण लेना पड़ता था। वहां बीजेपी सरकार ने किसानों की आर्थिक, सामाजिक स्थिति को बेहतर किया। उत्पादन लागत कम करते हुए फसल का वाजिब हक किसानों को दिया है, सरकार हमेशा किसानों के साथ खड़ी रही है। जबकि यही छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार थी और देने का वक्त था, तब किसानों के हिस्से क्या आया ? सब्सिडी बंद कर दी गई। धान की खरीदी आधी-अधूरी की गई थी। 
छत्तीसगढ़ का जिक्र करना केवल एक उदाहरण मात्र है, ये बताने के लिए कि देश में चुनाव का माहौल होने से विपक्षी किस कदर चाल चल रहे हैं। लोगों को मोहरा बना रहे हैं। मेरा मानना है कि देश में ऐसे हालात के खिलाफ भी लोगों को एकजुट होने की जरूरत है। ऐसे दिग्भ्रमित लोगों को समझाने की जरूरत है कि थोड़े से लालच के लिए आप देश का बेड़ा गर्त नहीं कर सकते। 

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