मुझे पता है कि देश में पेट्रोल-डीजल
के दामों पर आमजन के मन में क्या चल रहा होगा। लेकिन आज मैं किसी समस्या की तरफ,
या राजनीतिक कारण, या किसी की गलती से ऐसा होने की बात नहीं कहूंगा। बस इतना
कहूंगा कि हमारे देश के माननीय प्रधानमंत्री खुद इस विषय पर काफी चिंतित हैं। हाल
में माननीय प्रधानमंत्री जी के निर्देश पर केंद्र सरकार के पेट्रोल-डीजल की कीमतों
में 2.50 रुपये प्रति लीटर की कमी के बावजूद इनके दाम लगातार बढ़ते जा रहे हैं। अब
माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी आज बड़ी विदेशी और देशी तेल कंपनियों के चीफ
एग्जीक्यूटिव से मिलेंगे।
दरअसल, अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी
कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। इसके चलते भी कीमतों पर
काबू पाना मुश्किल हो रहा है, क्योंकि इसका आधार ही अंतरराष्ट्रीय है। ब्रिटिश
ब्रेंट क्रूड की कीमतें 85 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जा चुकी है।
आपको बताते चलें कि कांग्रेस नीत यूपीए
गठबंधन के 2004 से 2014 के शासनकाल में पेट्रोल की कीमत 75.8% जबकि डीजल का दाम 83.,7%
बढ़ा था, जबकि मई 2014 में बीजेपी की अगुवाई वाले एनडीए गठबंधन के सत्ता में आने
के बाद से अब तक पेट्रोल प्राइस सिर्फ 13% जबकि डीजल प्राइस महज 28% बढ़ी है। मैं
इस विषय पर आज बहुत अधिक बात नहीं करूंगा, लेकिन यह सच है कि पेट्रोल-डीजल की बढ़ी
कीमत यूपीए सरकार की ही देन है।

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