सबसे अच्छी बात रही कि पिछले पांच वर्षों में लिंगानुपात में आया सुधार और बालिकाओं के जन्म और जीवन प्रत्याशा दर में वृद्धि है। उन्होंने कहा कि ‘पोषण’ अभियान के तहत जरूरी पोषक तत्व मुहैया कराने और देश को 2019 तक खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) कराने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर चलाये जा रहे अभियानों से भी फर्क पड़ेगा।
यह एक और विषय की ओर इंगित करता है और बताता है कि हमारे माननीय प्रधानमंत्री आदरणीय श्री नरेंद्र मोदी जी की योजना ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ किस कदर अब रंग लाने लगी है। देश में बालक-बालिकाओं के सामान लिंगानुपात से यह स्पष्ट है कि लड़के-लड़कियों में हमारे देश की सम्मानित जनता अब कोई फर्क नहीं समझती।
आइए, हम कारवां को और आगे ले जाएं। जय हिंद।

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