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भारत में शिशु मृत्यु दर में काफी सुधार


हमें यह जानकर बहुत प्रसन्नता हुई कि भारत में शिशु मृत्यु दर में काफी सुधार हुआ है। शिशु मृत्यु दर अनुमान पर संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी (यूएनआईजीएमई) ने अपनी ताजा रिपोर्ट के अनुसार भारत में जो हाल में आंकड़ा पेश किया गया है, वह पांच वर्ष में सबसे कम है। यूनिसेफ इंडिया की प्रतिनिधि यासमीन अली हक ने कहा है कि शिशु मृत्यु दर के मामले में भारत में उल्लेखनीय सुधार हो रहा है। ऐसा पहली बार है जब भारत में जन्म से लेकर पांच वर्ष आयु वर्ग तक के बच्चों की मृत्यु दर इसकी इसी आयु वर्ग के जन्मदर के समान है। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में प्रसव में वृद्धि, नवजात शिशुओं के देखभाल के लिए सुविधाओं का विकास और टीकाकरण बेहतर होने से शिशु मृत्यु दर में कमी आयी है, जो हमारी केंद्र सरकार की उपलब्धियों को दर्शाता है।

सबसे अच्छी बात रही कि पिछले पांच वर्षों में लिंगानुपात में आया सुधार और बालिकाओं के जन्म और जीवन प्रत्याशा दर में वृद्धि है। उन्होंने कहा कि पोषण’ अभियान के तहत जरूरी पोषक तत्व मुहैया कराने और देश को 2019 तक खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) कराने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर चलाये जा रहे अभियानों से भी फर्क पड़ेगा।

यह एक और विषय की ओर इंगित करता है और बताता है कि हमारे माननीय प्रधानमंत्री आदरणीय श्री नरेंद्र मोदी जी की योजना बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ किस कदर अब रंग लाने लगी है। देश में बालक-बालिकाओं के सामान लिंगानुपात से यह स्पष्ट है कि लड़के-लड़कियों में हमारे देश की सम्मानित जनता अब कोई फर्क नहीं समझती।
आइए, हम कारवां को और आगे ले जाएं। जय हिंद।

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