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कर्नाटक को दिग्भ्रमित ना करें मुख्यमंत्री जी


एक बार एक मीडिया बंधु मुझे मीडिया की कुछ तकनीकी भाषाओं के बारे में बता रहे थे. मजेदार की काफी शब्दों के बीच एक शब्द आया था, "फुटेज खाना"... आज इस शब्द "फुटेज खाना" की याद इसीलिए आ रही है, क्योंकि आज कर्नाटक के मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी का वो बयान सुना जिसमें वो अपनी सरकार गिराने की साज़िश की बात कर रहे हैं... हद है... ये तो वही बात हो रही की "नाच ना जाने आंगन टेढ़ी"... जब कुमारस्वामी जनता की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पा रहे, हर मोर्चे पर फेल हो रहे हैं, तो वो अपनी को गिराने की साज़िश बता रहे हैं... कुमारस्वामी जी, ये काफी हास्यास्पद है, नींद से जग जाइए... आपकी सरकार ही है कर्नाटक में और आप ही वहां के मुख्यमंत्री हैं... अब आप कर्नाटक के मुखिया हैं... वहां के विकास के बारे में बात कीजिए... अनर्गल बयान देकर कर्नाटक की जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश मत कीजिए... क्योंकि अंत में जनता काम का हिसाब ही मांगेगी...
अगर आपका निशाना भारतीय जनता पार्टी है तो जान लीजिए कि हमारी पार्टी किसी जोड़ तोड़ में यकीन नहीं करती...
ये देश लोकतांत्रिक देश है और ये लोकतंत्र की खूबसरती है कि जो कोई सरकार सत्ता में आती है, जनता या विपक्ष को अपनी बात रखने की स्वतंत्रता होती है, कर्नाटक के श्रीमान मुख्यमंत्री जी, ये लोकतांत्रिक पद्धति तो हम होंगे तब भी रहेगी और ना रहेंगे तब भी रहेगी... लेकिन आपका मुख्यमंत्री होते हुए काम की बात ना कर अभी भी उसी पुरानी मानसिकता में जीना, आपकी ही मंशा पर संदेश उत्पन्न करता है...

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