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झूठ की कोई कसौटी नहीं, कोई मापदंड नहीं, जनता देगी जवाब

कितना आश्चर्य है कि भारतीय बैंकों को 9 हजार करोड़ का चूना लगाकर विदेश भागे विजय माल्या जैसे भगोड़ों के तर्कों से विपक्ष अपना तथ्य गढ़ रहा है। इसके पीछे की हकीकत का उल्लेख खुद वित्त मंत्री आदरणीय श्री अरुण जेटली जी कर चुके हैं। वह बता चुके हैं कि देश छोड़ने से पहले उनकी मुलाकात हुई थी, लेकिन मामला वैसा नहीं है जैसा बताया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा है कि माल्या का यह बयान तथ्यात्मक रूप से गलत है, क्योंकि इससे सच सामने नहीं आ रहा है। सवाल है कि माल्या भी इस बात को बताते हैं कि उनकी मुलाकात राज्यसभा में ही हुई, जैसा आ. अरूण जेटली जी ने बताया। आपको बता दें कि यूपीए-1 के दौर में ही जब प्रफुल्ल पटेल जी नागरिक उड्डयन मंत्री थे, तब किंगफिशर के मालिक विजय माल्या राज्यसभा के सदस्य बनकर पहुंचे। आ. अरूण जेटली जी भी राज्यसभा के सदस्य ही हैं। अब राज्यसभा का कोई सदस्य किसी सदस्य से बात करना चाहे तो यह मुश्किल है क्या ? आ. जेटली जी भी बता रहे हैं कि माल्या राज्यसभा सदस्य थे और सदन में आते थे। इस दौरान माल्या ने एक दिन सदस्य होने के विशेषाधिकार का फायदा उठाया और जब वो एक दिन सदन से बाहर निकलकर अपने कमरे की ओर जा रहे थे तो तेजी से चलते हुए उनके पास पहुंचे। बताया कि इस दौरान माल्या ने उनसे कहा कि वो सेटलमेंट का ऑफर दे रहे हैं।

सवाल है कि ऐसे वाकयों को कोई अगर राजनीतिक रंग दे दे, तो इसमें कौन क्या कर सकता है। झूठ की कोई सीमा नहीं होती, कोई कसौटी नहीं और कोई मापदंड नहीं होता... लेकिन झूठ की कसौटी बहुत समय तक टिक नहीं सकती है। विपक्षी दलों के इन्हीं झूठ का परिणाम है कि उनके हाथ से सत्ता जाती रही... इन्हें जनता जल्द जवाब देगी।

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