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एनपीए की समस्या के लिए कांग्रेस जिम्मेदार


आखिरकार कांग्रेस का परत-दर-परत और भी रहस्योद्घाटन होना जारी है। रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराज राजन जी ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह सरकार के दौरान हुई अनदेखियों पर कहा है कि उन्‍होंने अपने कार्यकाल में बड़े बकाएदारों की एक सूची तत्‍कालीन पीएमओ को दी थी, जिस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब तक जहां कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल जी और पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम जी ये दावा करते रहे कि एनपीए की समस्या यूपीए के कार्यकाल के बाद विकट हुई, ऐसे में रघुराम राजन जी के जवाब के बाद एनपीए की समस्‍या पर सब स्पष्ट सा हो गया है कि इसके लिए पूर्णतः यूपीए सरकार ही जिम्मेदार है।
राजन जी ने दावा किया कि बैंकों के सामने सबसे ज्यादा बैड लोन ऐसे हैं जिन्हें 2006 से 2008 के बीच आवंटित किया गया। भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए यह ऐसा समय था जब आर्थिक विकास दर बेहद अच्छी थी और बैंकों को अधिक से अधिक कर्ज देकर इस रफ्तार को बढ़ाने की जरूरत थी, लेकिन ऐसी परिस्थिति में बैंकों को चाहिए था कि वह कर्ज देने से पहले यह सुनिश्चित करता कि जिन कंपनियों को वह कर्ज दे रहा है, उनका स्वास्थ्य अच्छा है और वह समय रहते अपने कर्ज का भुगतान करने की स्थिति में हैं। सरकार की नीतिगत योजनाएं आज की तारीख तक पर्याप्त रफ्तार से आगे नहीं बढ़ पाई हैं। इस वजह से समय के साथ परियोजनाओं की लागत और कर्ज की राशि भी बढ़ती गई। देश में बिजली की भारी किल्लत के बावजूद बिजली संयंत्र परियोजनाएं अधर में लटकी हुई हैं। एनपीए का बड़ा हिस्सा 2006 से 2008 के दौरान बढ़ा, जबकि उस समय आर्थिक विकास दर मजबूत स्थिति में थी। इससे पहले बिजली संयंत्रों जैसी पूर्ववर्ती अधोसंरचना परियोजनाएं समय पर और बजट के अंदर पूरी हो गई थीं। यह ऐसा दौर था, जब बैंकों ने बड़ी गलतियां कीं। वे अतीत की विकास दर और भविष्य के परफॉर्मेंस को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करते रहे। लिहाजा, इन परियोजनाओं में अधिक से अधिक निवेश करते रहे। कई बार तो बैंक अपनी तरफ से कोई आकलन किए बगैर सिर्फ प्रमोटरों के निवेश बैंक की रिपोर्ट के आधार पर ही कर्ज देने की बातें सामने आती थीं। मेरा मानना है कि कांग्रेस की गलत नीतियां ही इसके पीछे का सबसे बड़ा कारण हैं। रघुराम राजन जी का यह बयान कांग्रेस को बेनकाब करता है।
और अब देश को पता चल गया है कि राहुल गांधी जी की कंपनी यंग इंडियन केवल कांग्रेस हित में काम करती है और उन्होंने अपनी संपत्ति आयकर से भी छिपाई हैं। सोनिया गांधी जी के दिशानिर्देश में पूर्ववर्ती यूपीए सरकार ने भारतीय बैंकिंग व्यवस्था की जड़ पर चोट पहुंचाने का काम किया है।

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