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दीदी जी, ये पब्लिक है, सब जानती है।

बड़ा ताज्जुब हुआ कि राजनीति क्या क्या रंग दिखाती है. जो पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जी कभी हिन्दू समर्थन में कोई निर्णय खुलकर लेने में हिचकती थीं, आज 2019 के चुनाव को सामने देख हिंदुत्व का कार्ड फेंक रही हैं. पश्चिम बंगाल में हिंदू कार्ड के जरिए जनाधार बढ़ाने में जुटी तृणमूल को अब हिंदुत्व याद आयी है. बीजेपी को जवाब देने की नीयत के साथ ममता बनर्जी जी ने भी दांव खेला है. राज्य में करीब 25 हजार दुर्गा पूजा कमेटियों की पहली बार आर्थिक मदद की सौगात दी गई है. मुझे ये सुनकर किसी हास्यास्पद विषय जैसा लगा.

माना जा रहा है कि इस पहल के जरिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जी ने ये जताने की कोशिश की है क्यूंकि उन पर अल्पसंख्यकों को खुश करने के लिए काम करने की बात ही कही जाती है. आखिर हंसी क्यूं ना आए, जो ममता बनर्जी जी हिन्दुओं के त्योहारों पर तमाम पाबंदियां लगाती रही हैं और दूसरे संप्रदायों को खुलेआम छूट देती रही हैं, उस पश्चिम बंगाल सरकार ने दुर्गा पूजा कमेटियों को सामुदायिक विकास कार्यक्रमों के लिए दस-दस हजार रुपये की मदद देने का निर्णय लिया है, जो पश्चिम बंगाल की जनता खूब समझ रही है.

पिछले वर्ष मुहर्रम और दुर्गा पूजा मूर्ति विसर्जन का वक्त एक साथ पड़ा था. इस दौरान दुर्गा पूजा मूर्तियों के विसर्जन को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार ने तरह-तरह की बंदिशें लगाईं थीं. जिससे मामला कोलकाता हाई कोर्ट पहुंच गया था. वहां उस दौरान हिंदुओं ने जो अपमान सहा था, वो आज भी उन्हें याद है. एक वर्ग के तुष्टीकरण की राजनीति ममता बनर्जी जी की नियती में हमेशा से शामिल रहा है. उस वक्त भी इसको लेकर सरकार के खिलाफ ज़बरदस्त नाराजगी थी.
खैर जो भी, बस इस विषय पर भी मुझे एक ही बात कहनी है, ये पब्लिक है, सब जानती है।

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