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जैन मुनि तरूण सागर जी के निधन से गहरा शोक

जैन मुनि तरुण सागर का 51 साल की उम्र में निधन होना पूरे देश के लिए एक गहरा शोक है। ऐसे महान संत, जिनकी जितनी विशेषता कहें, कम है। कहा जा रहा है कि जैन मुनि ने इलाज कराने से भी इनकार कर दिया था और कृष्णानगर स्थित राधापुरी जैन मंदिर चातुर्मास स्थल पर जाने का निर्णय लिया। उन्होंने धर्म और भक्ति मार्ग का प्रचार कर दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई। उनके निधन का समाचार सुन गहरा दुख पहुंचा। हम उन्हें हमेशा उनके प्रवचनों और समाज के प्रति उनके योगदान के लिए याद करेंगे। मेरी संवेदनाएं जैन समुदाय और उनके अनगिनत शिष्यों के साथ हैं। वे प्रेरणा के स्रोत, दया के सागर एवं करुणा के आगार थे। भारतीय संत समाज के लिए उनका निर्वाण एक शून्य का निर्माण कर गया है। मैं मुनि महाराज के चरणों में अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।
जैन मुनि ने देश की कई विधानसभाओं में प्रवचन दिया। जैन मुनि तरुण सागर का जन्‍म मध्य प्रदेश के दमोह में 26 जून, 1967 को हुआ था। उनकी मां का नाम शांतिबाई और पिता का नाम प्रताप चंद्र था। तरुण सागर ने आठ मार्च, 1981 को घर छोड़ दिया था, जिसके बाद उन्होंने छत्तीसगढ़ में दीक्षा ली थी। 

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