मुझे यह जानकार बहुत प्रसन्नता हुई कि हम सबके अभिभावकतुल्य माननीय उपराष्ट्रपति आदरणीय श्री एम. वेंकैया नायडू जी ने अपने एक साल के कार्यकाल में उल्लेखनीय रिकॉर्ड बनाया है और मीडिया उनके इस ख्याति की सराहना भी कर रही है। बताया गया है कि छात्रों, युवाओं, किसान, विज्ञान, अनुसंधान व संस्कृति से जुड़े विषयों पर उनके कार्यक्रम केंद्रित रहे। उन्होंने इस दौरान ऐसे 313 कार्यक्रमों में हिस्सा लिया जो उनकी कुल भागीदारी का 60 फीसद है। आदरणीय नायडू जी ने देश के सभी 29 राज्यों में से 28 का दौरा कर लिया जबकि 56 विश्वविद्यालयों और 16 अनुसंधान संस्थानों में हिस्सा लिया। उन्होंने साल के 365 दिनों में से 313 दिन बाहर आयोजित समारोहों में शिरकत की। हम आपको बताते चलें कि उन्होंने बीते वर्ष 11 अगस्त 2017 को 13वें उपराष्ट्रपति के रूप में शपथ ली थी। और उन्होंने पद की गरिमा के अनुरूप देश के हर हिस्से का दौरा किया। देश की संस्कृति को जानने-समझने के साथ युवाओं व छात्रों और किसानों से संबंधित समारोहों में हिस्सा लिया। दरअसल, पिछले एक साल के दौरान उनकी सक्रियता से जुड़े समारोहों को लेकर सचिवालय ने एक रिपोर्ट तैयार की है। यह रिपोर्ट इसलिए हमें प्रेरणा देती है, क्योंकि आज इस उम्र में भी वह अगर इतनी मेहनत कर सकते हैं, तो इससे हमें भी सीख लेनी चाहिए। मा. उपराष्ट्रपति कार्यालय के मुताबिक आदरणीय नायडू जी पहले ऐसे उपराष्ट्रपति होंगे, जिन्होंने पूरे देश का भ्रमण किया है।
राज्यसभा के सभापति के रूप में आदरणीय नायडू जी ने उल्लेखनीय व सराहनीय प्रदर्शन किया है। इस एक साल के दौरान तीन विभिन्न संसद सत्रों में नायडू ने 27 विधेयक पारित कराने में सफलता प्राप्त की है, जबकि पिछले दो सत्र हंगामे की भेंट चढ़ गये थे। सदन में कई बार ऐसे मौके आये, जब प्रश्नकाल में निर्धारित सभी सवालों के जवाब पूरे करा लिये गये। सख्त प्रशासक के रूप में सभापति नायडू ने राज्यसभा के तीन सदस्यों को अयोग्य भी ठहराया। राज्यसभा में सभी 22 भाषाओं में सांसदों को अपनी बात कहने की सुविधा प्रदान की। हम उनके इस कर्तव्यनिष्ठा पर उन्हें सहर्ष प्रणाम करते हैं। आने वाली पीढ़ी युगों-युगों तक उनसे प्रेरित होती रहेगी…
राज्यसभा के सभापति के रूप में आदरणीय नायडू जी ने उल्लेखनीय व सराहनीय प्रदर्शन किया है। इस एक साल के दौरान तीन विभिन्न संसद सत्रों में नायडू ने 27 विधेयक पारित कराने में सफलता प्राप्त की है, जबकि पिछले दो सत्र हंगामे की भेंट चढ़ गये थे। सदन में कई बार ऐसे मौके आये, जब प्रश्नकाल में निर्धारित सभी सवालों के जवाब पूरे करा लिये गये। सख्त प्रशासक के रूप में सभापति नायडू ने राज्यसभा के तीन सदस्यों को अयोग्य भी ठहराया। राज्यसभा में सभी 22 भाषाओं में सांसदों को अपनी बात कहने की सुविधा प्रदान की। हम उनके इस कर्तव्यनिष्ठा पर उन्हें सहर्ष प्रणाम करते हैं। आने वाली पीढ़ी युगों-युगों तक उनसे प्रेरित होती रहेगी…

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