मोदीसरकार ने पिछले चार वर्षों में ऐसे कई कदम उठाए हैं जो रेलवे का कायाकल्प करने
वाले हैं। प्रधानमंत्री ने रेलवे को एक ऐसा इंजन बनाने का लक्ष्य रखा है जो नए
भारत की दिशा में देश की विकास यात्रा को नई गति प्रदान करेगा।
देखा जाए तो मोदी
सरकार ने महज साढ़े तीन साल में इतना काम किया है कि वह तीस साल के बराबर है। मोदी
सरकार के पहले तीन वर्ष में 16700 किलोमीटर रेल लाइनों का विद्युतीकरण किया जबकि
उससे पिछले 30 साल में 19000 किलोमीटर रेल
लाइनों का विद्युतीकरण हुआ था।
इसी
तरह सरकार ने इस दौरान 12690 किलोमीटर रेल लाइन के दोहरीकरण की मंजूरी दी जबकि
पिछले 30 साल में महज 7192 किलोमीटर रेल लाइनों का दोहरीकरण किया गया। रेल हादसों
को रोकने के लिए इंजनों में माडर्न तकनीक पर आधारित 12000 करोड़ रूपये की सुरक्षा
प्रणाली लगाई जा रही है। इसके तहत इलेक्ट्रिक इंजनों में यूरोपीयन ट्रेन प्रोटेक्शन
सिस्टम लगाकर उसे पहले से अधिक सुरक्षित बनाया जाएगा। रेल दुर्घटनाओं को रोकने के
लिए परंपरागत कोच की जगह अब सिर्फ हल्के व नए डिजाइन वाले एलएचबी कोच लगाए जा रहे
हैं। अब रेलवे अपने कारखानों में परंपरागत रेल कोच की जगह सिर्फ एलएचबी कोच का
निर्माण कर रहा है।
रेलवे
के लिए सीधी बिजली खरीद करने से हर साल हजारों करोड़ रूपये की बचत हो रही है। रेल
पटरियों की सुरक्षा और स्वच्छ भारत मिशन की ओर कदम बढ़ाते हुए अब तक 55 फीसदी
यात्री गाड़ियों में बायो टायलेट लगा दिए गए हैं। सरकार ने दिसंबर 2018 तक सभी
रेलगाड़ियों में बॉयो टायलेट लगाने का लक्ष्य रखा है। रेलवे में जारी भ्रष्टाचार
रोकने में भी सरकार को कामयाबी मिली है। रेलवे के ठेकों में वर्षों से कब्जा जमाए
बैठे भ्रष्ट ठेकेदारों के वर्चस्व को तोड़कर ई-टेंडरिंग की शुरूआत की गई है।
मुझे
यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि केवल इस वर्ष 1,983 किलोमीटर
रेलवे लाइन चालू की गईं और 1375 किलोमीटर रेलवे विद्युतीकरण का काम पूरा हुआ,
जो
सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। वहीं बीते साल हाईवे परियोजनाएं देने में 120% की वृद्धि
हुई।

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