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की वफ़ा हमसे तो ग़ैर ज़फ़ा कहते हैं...

दिल्ली में जंतर-मंतर पर राजद नेता तेजस्वी यादव मुजफ्फरपुर रेप कांड और बिहार के माननीय मुख्यमंत्री आदरणीय श्री नीतीश कुमार जी के विरोध में धरने का आयोजन करते हैं। कैंडल मार्च कर सरकार के खिलाफ विरोध जताते हैं। और फिर कहते हैं कि वह यहां राजनीति करने नहीं आए हैं। सवाल है कि दुख किसे नहीं है ? इंसाफ कौन नहीं चाहता है ? क्या कोई मुख्यमंत्री अपने शासन में ऐसी घटनाओं को पसंद करेगा ? दोषियों को किसी हालत में नहीं छोड़ा जाएगा। लेकिन जिस तरह राजद और विपक्षी दलों का चेहरा सामने आया है, उससे मुझे मशहूर शायर मिर्ज़ा ग़ालिब का एक शेर याद आ रहा है- की वफ़ा हमसे तो ग़ैर जफ़ा कहते हैं, होती आई है कि अच्छों को बुरा कहते हैं.
राजद नेता यह भूल रहे हैं कि वो किसे उल्लू बना रहे हैं ? इसी बिहार में जब वह आदरणीय नीतीश जी के साथ सरकार में शामिल थे, कुर्सी का सुख भोग रहे थे तो बिहार की शासन व्यवस्था अच्छी होती थी... आदरणीय नीतीश जी उनके लिए एक योग्य और विकास पुरूष थे, लेकिन अब जब वो सरकार में नहीं हैं, माननीय मुख्यमंत्री ने उनके कारनामों से तंग आकर उन्हें बाहर कर दिया तो आदरणीय नीतीश जी ख़राब हो गए सवाल है कि हमारी मंशा कितनी दूषित हो चुकी है कि हम हर विषय को राजनीतिक तौर पर देखते हैं। इतने अंधे हो गए हैं कि कुर्सी में रहें तो सब ठीक, कुर्सी जाते व्यंग्यात्मक भाव शुरू... हमें सहयोग की भावना रखनी चाहिए तेजस्वी जी... हर विषय पर राजनीति ठीक नहीं... सबसे पहले हम जनता के हैं, फिर कुर्सी के। कुर्सी के लिए आप कुछ भी कहेंगे, कुछ भी करेंगे, यह जनता के साथ सरासर अन्याय है। रही बात मुजफ्फरपुर कांड की, तो माननीय मुख्यमंत्री ने कई बार कहा है कि ऐसी घटना पर वह शर्मिंदा हैं, लेकिन दोषी को किसी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

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