राज्यसभा के उपसभापति बने राज्य सभा सांसद हरिवंश नारायण सिंह को मैं हृदय से बधाई देता हूं। 30 जून 1956 को सिताब दियारा को उनका जन्म हुआ और एक गांव में प्राथमिक शिक्षा हासिल करने के बाद बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा हासिल की। यह बात आज इसलिए अहम है क्योंकि भारत गांवों में बसता है और हम एक गांव में साधारण परिवार में पले-बढ़े व्यक्ति को आदर्श मान सकते हैं, जो एक छोटे से गांव से निकलकर आज राज्यसभा के उपसभापति पद पर आसीन हो सकते हैं।
बैरिया तहसील क्षेत्र के दलजीत टोला ( जयप्रकाशनगर ) के मूल निवासी आदरणीय हरिवंश बाबू को एनडीए की ओर से उपसभापति निर्वाचित होने की घोषणा होते ही गांव के लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई। उनके पैतृक आवास पर पहुंचने लगे, उनके आवास पर मौजूद उनके चचेरे भाई आदरणीय कृष्ण सिंह को लोगो ने बधाई देनी शुरू कर दी। पूरे दिन सिताबदियारा के लोगों का तांता लगा रहा। लोगों मे यह चर्चा रही कि जेपी के जयप्रकाशनगर सिताबदियारा का नाम कई दशकों से चर्चा में रहा है फिर एक बार आदरणीय हरिवंश बाबू के उपसभापति चुने जाने पर नए रूप में चर्चित हो गया है।
आदरणीय हरिवंश जी को बधाई देने के साथ ही मैं देश के तमाम गांववासियों में गांवों में निवास कर अध्ययन का कार्य कर रहे उन करोड़ों छात्रों से कहना चाहूंगा कि आप आदरणीय हरिवंश बाबू जैसे महान व्यक्तित्व को अपना प्रेरणा-स्रोत मान सकते हैं, जिन्होंने कई आभावों में भी परिस्थितियों से लड़ना सीखा और आज इस मुकाम पर आ खड़े हुए। इससे हमें ये सीख मिलती है कि आप किन परिस्थितियों में हैं, इससे ज्यादा महत्वपूर्ण होता है कि आपके हौंसले किस कदर ऊंचे हैं।

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