राफेल डील पर जिस तरह राहुल गांधी जी का संसद के बाद अब हर जगह झूठ जगजाहिर हो रहा है, उससे एक बार
फिर देश शर्मिंदा हो सकता है। कितना दुखद है कि जब बीते संसद सत्र में राहुल गांधी जी के आरोप के बाद फ्रांस तक को मीडिया में जाकर भारत सरकार के द्वारा ऐसी किसी गलत मंशा का खंडन किया गया, वहीं कांग्रेस लगातार इस विषय को बार-बार उठाकर दुनिया के सामने भारत की छवि को एक गैर-जिम्मेदाराना बनाने की कोशिश कर रही है। हकीकत में देखा जाए तो सत्ता पाने के लिए कांग्रेस की ये सारी बौखलाहट है और इसमें वह अच्छे-बुरे का फर्क भी खत्म कर चुकी है। गौरतलब है कि कांग्रेस ने खुद A टू Z घोटाले किए हैं। नोटबंदी से कालेधन पर चोट हुई और अनकाउंटेड पैसा बैंकिंग सिस्टम में आया। राहुल चाहते हैं कि राफेल पर चढ़कर उनकर करियर लॉन्च हो तो ऐसा नहीं होगा। दरअसल, गांधी परिवार ने जो पैसा बनाया था, वह नोटबंदी से कागज हो गया, इसलिए राहुल इसका विरोध कर रहे हैं। केंद्र सरकार पर सवाल उठाने से पहले राहुल को यह सोचना चाहिए कि आदरणीय श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में 48 महीना में किया गया विकास, कांग्रेस का 48 वर्ष भी नहीं कर पा रही है।
आज सुबह सुबह मध्य प्रदेश की एक ऐसी खबर पर नजर गई जो कांग्रेस एवं तमाम विपक्षी दलों के झूठ और किसानों को दिए झाँसे की पोल खोल कर रख देती है... झूठ के बल पर जहां कांग्रेस ने हाल में कुछ राज्यों में सरकारें बना ली, वहीं जब सच में किसानों का कर्ज माफी की बात सामने आ रही है तो नतीजा गोलमाल और हेराफेरी सा प्रतीत हो रहा है... मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले में किसान ऋण माफी की प्रक्रिया शुरू होते ही 76 कृषि साख सहकारी समितियों में हुए घोटाले की परतें खुलने लगी हैं। समितियों की ओर से पंचायत पर ऋणदाताओं की सूची चस्पा की तो ऐसे किसान सामने आए, जिन्होंने ऋण लिया ही नहीं, लेकिन वह कर्जदार हैं। किसानों ने जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की शाखा व समितियों पर पहुंच कर आपित्त दर्ज कराई है। किसानों का कहना है कि जब बैंक से कर्ज लिया ही नहीं तो माफी कैसी? जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की ओर से किसानों को फसल के लिए ऋण साख सहकारी समितियों के माध्यम से दिया जाता है। पिछले दस साल में बिना कागजी कार्रवाई किए 120 करोड़ का फर्जी ऋण वितरण किया गया। वर्ष 2010 में ऋण वितरण घोटाला सामने आया था, लेकिन तत्कालीन भाजपा...

Comments
Post a Comment