राफेल डील पर जिस तरह राहुल गांधी जी का संसद के बाद अब हर जगह झूठ जगजाहिर हो रहा है, उससे एक बार
फिर देश शर्मिंदा हो सकता है। कितना दुखद है कि जब बीते संसद सत्र में राहुल गांधी जी के आरोप के बाद फ्रांस तक को मीडिया में जाकर भारत सरकार के द्वारा ऐसी किसी गलत मंशा का खंडन किया गया, वहीं कांग्रेस लगातार इस विषय को बार-बार उठाकर दुनिया के सामने भारत की छवि को एक गैर-जिम्मेदाराना बनाने की कोशिश कर रही है। हकीकत में देखा जाए तो सत्ता पाने के लिए कांग्रेस की ये सारी बौखलाहट है और इसमें वह अच्छे-बुरे का फर्क भी खत्म कर चुकी है। गौरतलब है कि कांग्रेस ने खुद A टू Z घोटाले किए हैं। नोटबंदी से कालेधन पर चोट हुई और अनकाउंटेड पैसा बैंकिंग सिस्टम में आया। राहुल चाहते हैं कि राफेल पर चढ़कर उनकर करियर लॉन्च हो तो ऐसा नहीं होगा। दरअसल, गांधी परिवार ने जो पैसा बनाया था, वह नोटबंदी से कागज हो गया, इसलिए राहुल इसका विरोध कर रहे हैं। केंद्र सरकार पर सवाल उठाने से पहले राहुल को यह सोचना चाहिए कि आदरणीय श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में 48 महीना में किया गया विकास, कांग्रेस का 48 वर्ष भी नहीं कर पा रही है।
देश के यशस्वी प्रधानमंत्री आ. नरेंद्र मोदी जी ने एक नारा दिया था, सबका साथ, सबका विकास... देशवासियों को इसका पर्याय एक के बाद समझ में आ गया होगा। 07 जनवरी 2019 को हिन्दुस्तान के संवैधानिक इतिहास में एक ऐसा मोड़ आया, जब आरक्षण के चल रहे मापदंडों को बिना छेड़े, सवर्णों को भी 10 फीसदी आरक्षण देने की घोषणा मा. प्रधानमंत्री ने कर दी। मेरा मानना है कि इससे ज्यादा ‘अच्छे दिन’ का उदाहरण देने की आवश्यकता नहीं है। माननीय प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में एक के बाद एक सकारात्मक कदम इस बात का सुबूत है कि हम विकास की ओर दिन प्रतिदिन अग्रसर हो रहे...

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