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माननीय प्रधानमंत्री जी का नेपाल दौरा अहम

माननीय प्रधानमंत्री आदरणीय श्री नरेंद्र मोदी जी काठमांडू में होने वाली दो दिवसीय बे ऑफ बंगाल इनिशिएटिव फॉर सेक्टोरल टेक्नीकल एंड इकॉनोमिक को-ऑपरेशन’ (बिम्सटेक) के चौथे सम्मेलन में शामिल होने के लिए नेपाल पहुंचे हैं। BIMSTEC सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना से भी होगी। माननीय प्रधानमंत्री जी का दौरा इसलिए अहम है, क्योंकि असम में राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर यानी एनआरसी को लेकर विपक्षी दलों का इसे अनावश्यक तूल देने की ना-पाक कोशिश की जा रही है। उम्मीद है कि नेपाल भी केंद्र सरकार के इस फैसले के साथ खड़ा दिखाई देगा। आपको बता दें कि बिम्सटेक में सात देश-बांग्लादेश, भूटान,भारत, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और थाइलैंड शामिल हैं। शामिल देशों की कुल आबादी 1.5 अरब है। दुनिया के लिहाज से देखें तो यह 21 प्रतिशत है। इस समूह में शामिल देशों की कुल जीडीपी 2500 अरब डॉलर है। बिस्मटेक सम्मेलन दो साल बाद हो रहा है, इससे पहले भारत के गोवा में बिस्मटेक सम्मेलन का आयोजन हुआ था। हम अपने माननीय प्रधानमंत्री जी के दुनिया में भारत की छवि को बेहतर करने के कौशल की जितनी तारीफ करें, कम है। 

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किसानों पर कांग्रेस का छलावा अब उजागर

आज सुबह सुबह मध्य प्रदेश की एक ऐसी खबर पर नजर गई जो कांग्रेस एवं तमाम विपक्षी दलों के झूठ और किसानों को दिए झाँसे की पोल खोल कर रख देती है... झूठ के बल पर जहां कांग्रेस ने हाल में कुछ राज्यों में सरकारें बना ली, वहीं जब सच में किसानों का कर्ज माफी की बात सामने आ रही है तो नतीजा गोलमाल और हेराफेरी सा प्रतीत हो रहा है... मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले में किसान ऋण माफी की प्रक्रिया शुरू होते ही 76 कृषि साख सहकारी समितियों में हुए घोटाले की परतें खुलने लगी हैं। समितियों की ओर से पंचायत पर ऋणदाताओं की सूची चस्पा की तो ऐसे किसान सामने आए, जिन्होंने ऋण लिया ही नहीं, लेकिन वह कर्जदार हैं। किसानों ने जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की शाखा व समितियों पर पहुंच कर आपित्त दर्ज कराई है। किसानों का कहना है कि जब बैंक से कर्ज लिया ही नहीं तो माफी कैसी? जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की ओर से किसानों को फसल के लिए ऋण साख सहकारी समितियों के माध्यम से दिया जाता है। पिछले दस साल में बिना कागजी कार्रवाई किए 120 करोड़ का फर्जी ऋण वितरण किया गया। वर्ष 2010 में ऋण वितरण घोटाला सामने आया था, लेकिन तत्कालीन भाजपा...

प्रियंका गांधी क्या रावर्ट वाड्रा के लिये आई हैं ?

जिस दिन प्रियंका गांधी को कांग्रेस का औपचारिक रूप से महासचिव बनाया गया था , मुझे लगा था कि कांग्रेस में प्राण फूंकने और राहुल गांधी की एकरसता और मूर्खता से निपटने के लिए प्रियंका को लाया गया है । और कि ठीक ही लाया गया है । प्रियंका में संभावना भी बहुत देखी गई । लेकिन आज पता चला कि वह सारी कवायद तो राबर्ट वाड्रा के भ्रष्टाचार पर राजनीतिक पर्दा डालने की थी , रावर्ट वाड्रा को उबारने के लिए थी , कांग्रेस को उबारने की नहीं । दिल्ली में आज सुबह लगे राहुल , प्रियंका और रावर्ट वाड्रा के लगे पोस्टर भी यही चुगली खाते हैं , जो बाद में उतार दिए गए । लेकिन कांग्रेस इस में सफल होती फिलहाल तो नहीं दिख रही । आज शाम ई डी आफिस में राबर्ट वाड्रा को छोड़ कर फटाक से कांग्रेस महासचिव की कुर्सी पर जा कर बैठ जाना , फिर भाग कर ई डी आफिस रावर्ट वाड्रा को लेने आ जाना , बहुत ही बचकाना राजनीतिक कदम था प्रियंका का। अभी रावर्ट वाड्रा को ई डी के कई चक्कर लगाने हैं , तो प्रियंका राजनीति कब करेंगी , रावर्ट वाड्रा को अटेंड कब करेंगी। प्रियंका ने अपनी बाक़ायदा राजनीति का आज का पहला दिन बहुत ख़राब परफार्म किया । भ्रष्ट ही...