Skip to main content

कांग्रेस के पाकिस्तान-प्रेम से देश फिर से स्तब्ध

बड़ा ताज्जुब है कि कांग्रेस का पाकिस्तान-प्रेम अब खुलकर सबके सामने आ रहा है। जिस तरह नवजोत सिंह सिद्धू पाकिस्तान के पीएम बने इमरान खान के मेहमान बनने पाकिस्तान जाते हैं, वहां के आर्मी चीफ के गले मिलते हैं और उस पर कांग्रेस उनका पीठ थपथपाती है, इससे साफ है कि भारत में अव्यवस्था फैलाने के लिए कैसे कांग्रेस चुपके-चुपके पाकिस्तान से दोस्ताना हाथ बढ़ा रही है।
अखबारों व मीडिया में स्पष्ट है कि सिद्धू खुद राहुल गांधी जी से अनुमति लेकर पाकिस्तान गए थे। उसके बाद वहां के आर्मी चीफ से गले मिलने की सफाई देते हुए सिद्धू ने जिस प्रकार गुरुनानक देव के 550वें प्रकाश उत्सव पर करतार पुर साहिब के लिए रास्ता खुलने का बेतुका संदर्भ पेश किया, वह किसी हास्यास्पद तर्क से कम नहीं है। सबसे आश्चर्य कि कांग्रेस लगातार सिद्धू का पक्ष लेती चली गई है। और उससे भी बड़ा आश्चर्य कि सिद्धू की मुलाकात की तुलना माननीय प्रधानमंत्री जी आदरणीय श्री नरेंद्र मोदी जी और पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री से की जाने लगी, जो कूटनीतिक था।
कांग्रेस पार्टी प्रवक्ता जयवीर शेरगिल जी ने पार्टी लाइन पर रहते हुए बयान तो दियालेकिन सिद्धू के इस मिलने के वाकये को गलत बता रहे पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह जी के बयान पर भी सहमति जता बैठे। इसके बाद जब यह संदेश गया किपार्टी अमरिंदर जी की लाइन ले रही हैतो आनन-फानन में पार्टी नेता दिग्विजय सिंह जी और अम्बिका सोनी जी ने अगले ही दिन कैप्टन के बयान को दरकिनार करते हुए खुलकर सिद्धू का समर्थन कर दिया। कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह जी पाकिस्तान से चीनी आयात की दुहाई देने लग जाते हैं। कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी जी कहते हैं कि सिद्धू का पाकिस्तान जाना कोई मुद्दा ही नहीं है।
इस सब विषयों से स्पष्ट है कि कांग्रेस की मंशा किस कदर प्रदूषित हो चुकी है और कांग्रेस की बौखलाहट इस कदर है कि वह आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के विकास कार्यों को अवरूद्ध करने के लिए किसी भी देश के सुर में सुर मिला सकती है, पाकिस्तान तक से भी। हद है।

Comments

Popular posts from this blog

आदरणीय प्रधानमंत्री जी के फैसले का स्वागत

                                                                                                                                    देश के यशस्वी प्रधानमंत्री आ. नरेंद्र मोदी जी ने एक नारा दिया था, सबका साथ, सबका विकास... देशवासियों को इसका पर्याय एक के बाद समझ में आ गया होगा। 07 जनवरी 2019 को हिन्दुस्तान के संवैधानिक इतिहास में एक ऐसा मोड़ आया, जब आरक्षण के चल रहे मापदंडों को बिना छेड़े, सवर्णों को भी 10 फीसदी आरक्षण देने की घोषणा मा. प्रधानमंत्री ने कर दी। मेरा मानना है कि इससे ज्यादा ‘अच्छे दिन’ का उदाहरण देने की आवश्यकता नहीं है। माननीय प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में एक के बाद एक सकारात्मक कदम इस बात का सुबूत है कि हम विकास की ओर दिन प्रतिदिन अग्रसर हो रहे...

किसानों पर कांग्रेस का छलावा अब उजागर

आज सुबह सुबह मध्य प्रदेश की एक ऐसी खबर पर नजर गई जो कांग्रेस एवं तमाम विपक्षी दलों के झूठ और किसानों को दिए झाँसे की पोल खोल कर रख देती है... झूठ के बल पर जहां कांग्रेस ने हाल में कुछ राज्यों में सरकारें बना ली, वहीं जब सच में किसानों का कर्ज माफी की बात सामने आ रही है तो नतीजा गोलमाल और हेराफेरी सा प्रतीत हो रहा है... मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले में किसान ऋण माफी की प्रक्रिया शुरू होते ही 76 कृषि साख सहकारी समितियों में हुए घोटाले की परतें खुलने लगी हैं। समितियों की ओर से पंचायत पर ऋणदाताओं की सूची चस्पा की तो ऐसे किसान सामने आए, जिन्होंने ऋण लिया ही नहीं, लेकिन वह कर्जदार हैं। किसानों ने जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की शाखा व समितियों पर पहुंच कर आपित्त दर्ज कराई है। किसानों का कहना है कि जब बैंक से कर्ज लिया ही नहीं तो माफी कैसी? जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की ओर से किसानों को फसल के लिए ऋण साख सहकारी समितियों के माध्यम से दिया जाता है। पिछले दस साल में बिना कागजी कार्रवाई किए 120 करोड़ का फर्जी ऋण वितरण किया गया। वर्ष 2010 में ऋण वितरण घोटाला सामने आया था, लेकिन तत्कालीन भाजपा...

प्रियंका गांधी क्या रावर्ट वाड्रा के लिये आई हैं ?

जिस दिन प्रियंका गांधी को कांग्रेस का औपचारिक रूप से महासचिव बनाया गया था , मुझे लगा था कि कांग्रेस में प्राण फूंकने और राहुल गांधी की एकरसता और मूर्खता से निपटने के लिए प्रियंका को लाया गया है । और कि ठीक ही लाया गया है । प्रियंका में संभावना भी बहुत देखी गई । लेकिन आज पता चला कि वह सारी कवायद तो राबर्ट वाड्रा के भ्रष्टाचार पर राजनीतिक पर्दा डालने की थी , रावर्ट वाड्रा को उबारने के लिए थी , कांग्रेस को उबारने की नहीं । दिल्ली में आज सुबह लगे राहुल , प्रियंका और रावर्ट वाड्रा के लगे पोस्टर भी यही चुगली खाते हैं , जो बाद में उतार दिए गए । लेकिन कांग्रेस इस में सफल होती फिलहाल तो नहीं दिख रही । आज शाम ई डी आफिस में राबर्ट वाड्रा को छोड़ कर फटाक से कांग्रेस महासचिव की कुर्सी पर जा कर बैठ जाना , फिर भाग कर ई डी आफिस रावर्ट वाड्रा को लेने आ जाना , बहुत ही बचकाना राजनीतिक कदम था प्रियंका का। अभी रावर्ट वाड्रा को ई डी के कई चक्कर लगाने हैं , तो प्रियंका राजनीति कब करेंगी , रावर्ट वाड्रा को अटेंड कब करेंगी। प्रियंका ने अपनी बाक़ायदा राजनीति का आज का पहला दिन बहुत ख़राब परफार्म किया । भ्रष्ट ही...