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पश्चिम बंगाल में गुंडाराज का एक और उदाहरण

कोलकाता में माननीय भाजपा अध्यक्ष की रैली से ठीक पहले जिस तरह पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जी और उनकी पार्टी टीएमसी का असली चेहरा सामने आया है,उससे लग चुका है कि पश्चिम बंगाल के लोग किस गुंडाराज में भय के माहौल में जीने को मजबूर हैं। आदरणीय अमित शाह जी के रैली ग्राउंड को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जी के कार्यकर्ताओं ने तृणमूल कांग्रेस के पोस्टरों से रंग दिया… पोस्टर वॉर शुरू कर दिया… जाहिर है, लोकतंत्र में ऐसे विरोध का कोई स्थान नहीं है। आप अगर किसी प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं और आपने बहुत अच्छी उपलब्धियां हासिल की हैं, तो आपको भाजपा से वहां डर क्यों लग रहा है? क्यों आप वहां ‘अमित शाह, गो-बैक’ के नारे लगा रहे हैं ? यह दिखाता है कि कैसे आप पूरे पश्चिम बंगाल में तानाशाही रवैया अपना रही हैं और अपने कार्यकर्ताओं को भी इसी राह पर चलने की शिक्षा दे रही हैं।
मुझे आश्चर्य तो तब हुआ, जब इस बारे में जब तृणमूल के नेताओं से मीडियाकर्मियों ने पूछा तो उन्होंने इस पर भी झूठ कहा कि 15 अगस्त की तैयारी के मद्देनजर तृणमूल के झंडों और हमारी नेता ममता बनर्जी के पोस्टरों से सजा रहे हैं। इसमें माननीय अमित शाह जी की मीटिंग का कोई मामला नहीं है, कितना बेवकूफी भरा बयान है ये। वैसे यह पहली बार नहीं है। इससे पहले जून में मा. अमित शाह जी के पुरुलिया व वीरभूम दौरा हो या फिर 16 जुलाई को पीएम नरेंद्र मोदी की सभा। तृणमूल कार्यकर्ताओं ने पूरे इलाके को ममता व तृणमूल के झंडे से पाट दिया था। लेकिन अब वो दिन दूर नहीं जब टीएमसी की तुष्टीकरण और गुंडागर्दी की राजनीति पर पश्चिम बंगाल की जनता ममता बनर्जी जी को करारा जवाब देगी।

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