केंद्र सरकार कर्मियों के लिए यह प्रसन्नता का विषय है कि आजादी के 71 साल बाद केंद्र सरकार के 48 लाख कर्मचारियों को विदेश भ्रमण का अवसर मिलने जा रहा है। मौजूदा व्यवस्था के तहत ये कर्मचारी अवकाश यात्रा रियायत (एलटीसी) के जरिए केवल अपने देश में ही घूम-फिर सकते हैं। मैं इस विषय को दूसरे नज़रिए से भी देखता हूं। जब हम आधुनिक भारत की बात करते हैं तो उसमें केवल आधुनिक समाज ही नहीं, बल्कि उस समग्रता का बोध होता है, जहां सबका साथ, सबका विकास समाहित होता है। ऐसे विदेशी दौरे से निस्संदेह किसी का बौद्धिक विकास होता है और उसका कार्यान्वयन उसी दृष्टिकोण से होता है। खास बात है कि एलटीसी के नए नियम जो कि अगले दो-तीन माह में लागू हो जाएंगे, उनके अंतर्गत किसी भी विभाग में चपरासी से लेकर अधिकारी तक सभी विदेश भ्रमण के योग्य होंगे। इसे वित्त मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय से औपचारिक मंजूरी मिल चुकी है। केवल इस पर मुहर लगना शेष है। नई नीति में फिलहाल मध्य एशिया के पांच देश उज्बेकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, तजाकिस्तान, किर्गिस्तान और कजाखस्तान को शामिल किया गया है।
देश के यशस्वी प्रधानमंत्री आ. नरेंद्र मोदी जी ने एक नारा दिया था, सबका साथ, सबका विकास... देशवासियों को इसका पर्याय एक के बाद समझ में आ गया होगा। 07 जनवरी 2019 को हिन्दुस्तान के संवैधानिक इतिहास में एक ऐसा मोड़ आया, जब आरक्षण के चल रहे मापदंडों को बिना छेड़े, सवर्णों को भी 10 फीसदी आरक्षण देने की घोषणा मा. प्रधानमंत्री ने कर दी। मेरा मानना है कि इससे ज्यादा ‘अच्छे दिन’ का उदाहरण देने की आवश्यकता नहीं है। माननीय प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में एक के बाद एक सकारात्मक कदम इस बात का सुबूत है कि हम विकास की ओर दिन प्रतिदिन अग्रसर हो रहे...

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