केंद्र सरकार कर्मियों के लिए यह प्रसन्नता का विषय है कि आजादी के 71 साल बाद केंद्र सरकार के 48 लाख कर्मचारियों को विदेश भ्रमण का अवसर मिलने जा रहा है। मौजूदा व्यवस्था के तहत ये कर्मचारी अवकाश यात्रा रियायत (एलटीसी) के जरिए केवल अपने देश में ही घूम-फिर सकते हैं। मैं इस विषय को दूसरे नज़रिए से भी देखता हूं। जब हम आधुनिक भारत की बात करते हैं तो उसमें केवल आधुनिक समाज ही नहीं, बल्कि उस समग्रता का बोध होता है, जहां सबका साथ, सबका विकास समाहित होता है। ऐसे विदेशी दौरे से निस्संदेह किसी का बौद्धिक विकास होता है और उसका कार्यान्वयन उसी दृष्टिकोण से होता है। खास बात है कि एलटीसी के नए नियम जो कि अगले दो-तीन माह में लागू हो जाएंगे, उनके अंतर्गत किसी भी विभाग में चपरासी से लेकर अधिकारी तक सभी विदेश भ्रमण के योग्य होंगे। इसे वित्त मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय से औपचारिक मंजूरी मिल चुकी है। केवल इस पर मुहर लगना शेष है। नई नीति में फिलहाल मध्य एशिया के पांच देश उज्बेकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, तजाकिस्तान, किर्गिस्तान और कजाखस्तान को शामिल किया गया है।
बीते दिनों भारत रेलवे की दो खबरों का सबको बेसब्री से इंतजार रहा। सबसे पहले श्री रामायण एक्सप्रेस और दूसरा नेक्सट जेनरेशन ट्रेन-18। सबसे पहले आपको श्री रामायण एक्सप्रेस के बारे में बताते हैं। दिल्ली से अयोध्या और फिर श्रीलंका तक के दर्शन की सुविधा प्रदान कर रहे इस ऐतिहासिक कदम का मैं दिल से स्वागत करता हूं। यह पैकेज 16 दिन का होगा और इस दौरान भगवान राम के जीवन से जुड़े सभी स्थलों के लोगों को दर्शन कराए जाएंगे। भारतीय परंपरा और देश की एकता और अखण्डता से रू-ब-रू कराने के लिए इस पहल की मैं जितनी प्रशंसा करूं, कम है। आपको बताते चलें कि ये ट्रेन दिल्ली से रवाना होने के बाद अयोध्या में पहला पड़ाव होगा। इसके बाद ये हनुमान गढ़ी , रामकोट और कनक भवन मंदिर जाएगी। ट्रेन रामायण सर्किट के महत्वपूर्ण स्थलों जैसे नंदीग्राम , सीतामढ़ी , जनकपुर , वाराणसी , प्रयाग , श्रृंगपुर , चित्रकूट , नासिक , हम्पी और रामेश्वरम को कवर करेगी। ट्रेन अपनी यात्रा तमिलनाडु के रामेश्वरम में 16 दिनों में पूरी करेगी। श्री रामायण एक्सप्रेस में सफर करने वाल...

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