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जिन प्रधानमंत्री को देश ने नकारा, वो दे रहे नसीहत

कांग्रेस नेतृत्व की यूपीए सरकार का कार्यकाल सभी को याद होगा। टू जी, थ्री जी, जीजाजी... ना जाने कौन से "जी" को खुश करने और करवाने की वो घड़ी थी कि बस घोटाले पर घोटाले हुए... इतने घोटाले कि उसकी क्षतिपूर्ति आज भी देश भर ही रहा है... वह खुद प्रधानमंत्री रहते तो इतने विद्वान होकर ना जाने किन कारणों से मौन थे, लेकिन ताज़्जुब कि आज वही पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी आज आ. नरेंंद्र मोदी जी की सरकार को नसीहत दे रहे हैं.
वह कह रहे हैं कि सरकार सभी मोर्चों पर विफल रही है और वह 2014 में किए गए वादों को पूरा नहीं कर पाई है. जबकि वह ये भूल रहे हैं देश 2014 तक किस स्तर पर आ खड़ा था. एक कांग्रेस नेता तो कहते हैं कि जीएसटी को हड़बड़ाहट में लागू किया गया और इससे व्‍यापारियों को नुकसान हुआ, जबकि वो ये भूल रहे हैं कि इसी देश ने जीएसटी को स्वीकारा और पूरा देश आज भी सहयोग कर रहा है. कांग्रेस नोटबंदी की आलोचना करते हैं, तो मैं बताना चाहता हूं कि आज वही लोग नोटबंदी से परेशान हैं जिनका ब्लैक मनी बर्बाद हो गया.
वो कहते हैं किसान परेशान हैं, लेकिन उन्हें इतना भी नहीं पता कि आज किसानों कि ऋण माफी से लेकर इतनी योजनाएं हैं, जिनसे किसानों का मनोबल बढ़ा है और देश 2022 तक किसानों कि आय दोगुनी करने कि राह पर है. इतिहास में ये पहले बार है कि देश का एक प्रधानमंत्री किसानों को अन्नदाता कहने के अभिप्राय को स्पष्ट कर रहा है, नहीं आज तक किताबों में ही किसानों को अन्नदाता की संज्ञा दी जाती थी. किसानों के बारे में सोचा तो बस मोदी जी की सरकार ने.

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