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मर्यादा को तोड़ना, कांग्रेस की पुरानी परंपरा

कितना दुखद और अफसोसजनक है कि कांग्रेस प्रमुख द्वारा देश के प्रधानमंत्री के लिए ‘अपशब्द’ का प्रयोग किया जा रहा है। कांग्रेस प्रमुख का ‘व्यवहार’ इतना ‘शर्मनाक’ कैसे हो सकता है। हमारी पार्टी देशहित के किसी मुद्दे पर किसी से समझौता नहीं करेगी। हमारी पार्टी ने भी संकेत दे दिया है कि वह वायुसेना को मजबूत बनाने के लिए फ्रांस से लड़ाकू विमान खरीदने के लिए आगे बढ़ेगी। राहुल गांधी जी द्वारा उपयोग की जाने वाली भाषा सभ्यता के किसी भी मानदंड का पालन नहीं करती है, इसलिए हम इस तरह की भाषा के उपयोग की निंदा करते हैं। कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप कितनी बार झूठ फैलाते हैं, यह कभी सच नहीं बन जाएगा। हकीकत तो ये है कि पिछले संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार ने वर्ष 2012 में समीक्षा के लिए बीच में ही राफेल सौदे को रोक दिया था क्योंकि वह राबर्ट वाड्रा के करीबी सहयोगी संजय भंडारी को ‘इसमें लाना’ चाहती थी। 

और सबसे बड़ी बात कि हमारे देश की वायुसेना ने मौजूदा सरकार की राफेल डील को भी सही ठहराया है। वायुसेना के डिप्टी एयरचीफ मार्शल आर. नांबियार ने जोर देकर कहा है कि मोदी सरकार का 36 राफेल विमान सौदा पूर्ववर्ती 126 विमानों के सौदे से कहीं बेहतर है। उन्होंने कांग्रेस का नाम लिए बगैर यह भी कहा कि लोगों को इस बारे में गलत जानकारी दी जा रही है।
दरअसल, पाकिस्तान का सोचना है कि भारत यदि इन लड़ाकू विमानों को खरीदता है तो वह (भारत) और अधिक शक्तिशाली हो जायेगा तो वहीं कांग्रेस को डर है कि भाजपा की ताकत इससे बढ़ जायेगी और इसलिए वह सौदे की आलोचना कर रही है।
ऐसा नहीं है कि ये अभद्र शब्द हमारे पार्टी के लोग नहीं जानते, लेकिन यही हमारे और उनके संस्कार में फर्क है, लेकिन राजनीति के लिए इनका इस्तेमाल करने का हमारा कोई इरादा नहीं हैं। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी जी ने प्रधानमंत्री के खिलाफ बहुत ही अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया है। हम उनके व्यवहार को शर्मनाक ही कह सकते हैं। 

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