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पंडित दीनदयाल जी की जयंती पर उन्हें नमन।

जाने-माने विचारक, दार्शनिक और राजनीतिक पार्टी भारतीय जनसंघ के सह-संस्थापक पंडित दीनदयाल उपाध्याय की आज जयंती है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय जब अपनी स्नातक स्तर की शिक्षा हासिल कर रहे थे, उसी वक्त वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के संपर्क में आये और वह आरएसएस के प्रचारक बन गये। हालांकि प्रचारक बनने से पहले उन्होंने 1939 और 1942 में संघ की शिक्षा का प्रशिक्षण लिया था और इस प्रशिक्षण के बाद ही उन्हें प्रचारक बनाया गया था। वर्ष 1951 में भारतीय जनसंघ की नींव रखी गई थी और इस पार्टी को बनाने का पूरा कार्य उन्होंने श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ मिलकर किया था।
अपनी इस राजनीतिक दर्शन के माध्‍यम से उन्‍होंने हर मनुष्‍य के शारीरिक, बौद्धिक, चेतना और आत्मिक विकास की बात कही। उनका दर्शन भौतिकता और आध्‍यात्मिकता का संश्लिष्‍ट रूप है। उन्‍होंने देश में विक्रेंदीकृत राजनीति की बात कही और आत्‍म-निर्भर अर्थव्‍यवस्‍था का नारा दिया। अपने विचारों के प्रचार-प्रसार के लिए 'राष्‍ट्र धर्म' से लेकर'पांचजन्‍य' तक कई पत्रिकाओं का संपादन किया।
हमारे आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र भाई मोदी जी ने भी सरकार की नीतियों के वैचारिक दर्शन के लिए संभवतया सबसे अधिक पंडित दीनदयाल उपाध्‍याय जी के नाम का जिक्र अपने भाषणों में किया है। राजनीति-सामाजिक क्षेत्र में 'एकात्‍म मानवतावाद' का दार्शनिक विचार पेश करने वाले आरएसएस विचारक और भारतीय जनसंघ के सह-संस्‍थापक दीनदयाल उपाध्‍याय की आज जयंती है। भारतीय जनसंघ से ही 1980 में भारतीय जनता पार्टी का उदय हुआ है। ऐसे महान पुरूष की जन्‍म-जयंती पर उन्‍हें कोटि-कोटि नमन।'

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