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ये महा गठबंधन नहीं, ठगबंधन है।

देश के यशस्वी प्रधानमंत्री अा. श्री नरेन्द्र भाई मोदी जी को हराने के लिए पूरा कांग्रेस और कुछ विपक्षी डाल एड़ी चोटी एक किए हुए है. मन मिला नहीं लेकिन केवल अा. नरेन्द्र भाई को हराने के लिए महागठबंधन बनाने पर बात होने लगी. लेकिन झूठ की हांडी बहुत देर तक नहीं टिकती. बिखराव अभी से शुरू है... क्यूंकि हर एक का मिशन तो यहां विकास है ही नहीं, बस कुर्सी की भूख है. अब देखिए छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले ही कांग्रेस को झटका लग गया है. अजीत जोगी की पार्टी जनता कांग्रेस (छत्तीसगढ़-जे) और मायावती की बीएसपी के बीच गठबंधन हुआ है और वे दोनों साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगे. दोनों दलों के बीच हुए समझौते के तहत 90 में से 35 सीटों पर BSP, लड़ेगी जबकि अजीत जोगी की पार्टी 55 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी. इससे पहले ऐसे कयास लगाए जा रहे थे कि बसपा छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के साथ गठबंधन कर सकती है.

छत्तीसगढ़ में इस साल के आखिर में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए सभी विपक्षी राजनीतिक पार्टियां तैयारियों में जुटे हुए हैं. कांग्रेस ने अब तक सीएम पद के उम्मीदवार का ऐलान नहीं किया है. वह मायावती की तरफ मुंह किए खड़ी थी. सवाल है कि राजनीति का स्वरूप क्या इस कदर बिगड़ चुका है कि जोड़ तोड़ कर पार्टियां सरकार बनाने की मंशा रखती हैं. ये किसी राज्य या देश के लिए सही संदेश नहीं है. पहले विरोध करना, फिर सहमति के लिए लालायित होना, फिर बात ना बने तो सामने वाले को भला बुरा कहना. मूर्ख समझा जाता है तो केवल जनता को... लेकिन इन्हें नहीं पता कि अब जनता बुद्धिजीवी है, ये देश बदलने का माद्दा रखती हैं... इन ठगबंधन वालों को हाल के चुनावों को बराबर जवाब मिलेगा...

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