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ऐतहासिक तीन तलाक पर धन्यवाद की पात्र केंद्र सरकार


 
अपनी सरकार पर हर्ष और गौरव हो रहा है कि भारत सरकार ने तीन तलाक बिल पर अध्यादेश लाकर ना केवल वर्षों से गुलामी की ज़िंदगी जी रहीं हमारी मुस्लिम बहनों को नई ताकत दी है, महिला सशक्तीकरण की दिशा में नई अलख जगाई है। केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को तीन तलाक अध्यादेश को मंजूरी दे दी है। तीन तलाक देना अब अपराध माना जाएगा। बता दें कि नए बिल में तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) के मामले को गैर जमानती अपराध माना गया है लेकिन संशोधन के हिसाब से अब मजिस्ट्रेट को जमानत देने का अधिकार होगा।

जैसा पूरे देश को कांग्रेस की मंशा के बारे पता है, कांग्रेस के नेताओं की वजह से ये ऐतिहासिक बिल लोकसभा से पारित होने के बाद राज्यसभा में अटक गया था। कांग्रेस समेत अन्य दलों ने संसद में विधेयक में संशोधन की मांग की, संशोधन के बावजूद यह विधेयक राज्यसभा से पारित नहीं होने दिया। इस मामले पर धन्यवाद की पात्र हिंदुस्तान की मीडिया भी है, जिन्होंने विस्तार से समय समय पर इस गंभीर विषय को उठाया और सरकार का ध्यान आकर्षित किया। वोट बैंक के दबाव में कांग्रेस ने तीन तलाक बिल को समर्थन नहीं दिया। मेरा मानना है कि कम से कम सोनिया गांधी जी, ममता बनर्जी जी और मायावती जी, जो खुद एक महिला है, को इस मुद्दे पर सरकार का साथ देना चाहिए था।

भारत जैसे धर्मनिरपेक्ष मुल्क में बड़ी संख्या में महिलाओं के साथ नाइंसाफी हो रही थी। तीन तलाक का यह मुद्दा नारी न्याय और नारी गरिमा का मुद्दा है। अपराध संज्ञेय तभी होगा, जब खुद पीड़ित महिला या उसके परिजन शिकायत करेंगे। सिर्फ पीड़िता पत्नी ही चाहेगी तभी समझौता होगा। मजिस्ट्रेट बेल दे सकता है, मगर वह भी पीड़िता की सहमति से ही। अन्य प्रावधान के संबंध में, मां/पीड़ित पत्नी को नाबालिग बच्चे की कस्टडी मिलनी चाहिए। वो खुद अपने लिए (पीड़िता) और अपने बच्चे के लिए मजिस्ट्रेट द्वारा निर्धारित रखरखाव की हकदार होगी।

 सबसे अहम है कि इस अध्यादेश को मंजूरी मिलने के बाद उत्तर प्रदेश में शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने खुशी जताई है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की जीत हुई है। महिलाओं ने कट्टरपंथी तबके से टकराते हुए मामले को समाज में लाने काम किया और सुप्रीम कोर्ट तक गईं। कट्टरपंथी समाज के खिलाफ हिंदू और मुस्लिम समाज समेत सभी लोग पीड़ित महिलाओं के साथ हैं। रिजवी ने कहा कि अब हम परिवार में लड़कियों की हिस्सेदारी के लिए भी आगे लड़ाई लड़ेंगे।

सबसे आश्चर्यजनक है कि कांग्रेस के नेता अभी राजनीति से बाज नहीं आ रहे। आज ही मैं सुन रहा था कि कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला जी ने कहा कि मोदी सरकार इसे मुस्लिम महिलाओं के लिए न्याय का मुद्दा नहीं बना रही है, बल्कि सरकार इसे राजनीतिक मुद्दा बना रही है। मतलब कि हद ही हो गई है अब। सुरजेवाला जी, ईश्वर देख रहे हैं। अब बस कीजिए हर विषय पर राजनीतिक वाली बातें।

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